16 वाँ वित्त आयोग: अरविंद पनगढ़िया। Finance Commission

16 वाँ वित्त आयोग: अरविंद पनगढ़िया। Finance Commission

राजस्थान को आधे भारत के लोगों के साथ पूरा व्यावसायिक जगत मारवाड़ी लोगों के रुप में जानता है। मारवाड़ का नाम सुनते ही लोग मारवाड़ी और व्यवसाय कि सोचने लगते थे। शताब्दियों से भारत के लोग मारवाड़ी लोगों को व्यावसायी के रुप में जानते रहे। वर्तमान में, अर्थव्यवस्था कि रीढ़ के तौर पर मारवाड़ी कार्य कर रहे हैं, ऐसे में मारवाड़ी पृष्ठभूमि के व्यक्ति को वित्त आयोग के अध्यक्ष के रुप में नियुक्त किया जाना सराहनीय है तो जानते हैं, कैसे महत्वपूर्ण हो जाता है इन्हें वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया जाना। 
16 वाँ वित्त आयोग: अरविंद पनगढ़िया। Finance Commission


मारवाड़ी व्यापारियों की पहचान सेठ साहूकारों के रूप में भी रही है। सेठ-साहूकार पुराने जमाने में बैंक की तरह काम करते थे, जिन्हें आवश्यकता होती थी उन्हें उधार धनराशि देते थे, ऐसे में वित्त के उपयोग और निवेश की उन्हें हमेशा से समझ रही है। इसके इतर सेठ लोगों ने राजस्थान समेत देश के विभिन्न प्रदेशों में कुएं, बावड़ी खुदाई, तालाब बनाये और धर्मशाला का निर्माण कराया। उनके द्वारा समाज और लोक कल्याण के लिए विभिन्न कार्य किए ऐसे में मारवाड़ी लोगों में ज़न कल्याण की भावना भी विरासत से मिली हुई है। ऐसे में ही चर्चित है, एक मारवाड़ी जो अब देश के धन का निर्णय लेगा की उस धन का क्या उपयोग किया जाए। 

वित्त आयोग? 


वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। यह एक संवैधानिक निकाय है, जो भारत सरकार को राजस्व से सम्बन्धित सलाह देने के तौर पर सिफारिश देता है, लेकिन भारत सरकार इनकी सिफारिश को मानने के लिए बाध्य नहीं है। वित्त आयोग का गठन पांच वर्ष के अन्तराल से किया जाता है। वित्त आयोग को अपनी सिफारिशों को देने के लिए दो वर्ष की समयावधि दी जाती है। इस अवधि के दौरान आयोग द्वारा विभिन्न तथ्यों का अध्ययन कर एक विस्तृत रिपोर्ट बना महामहिम राष्ट्रपति को प्रस्तुत की जाती है। 

कार्य - वित्त आयोग भारत सरकार और आय और राजस्व के राज्यों के मध्य आवंटन से संबंधित सिफारिश देता है, इसके द्वारा निम्नलिखित कार्यो को अंजाम दिया जाता है - 
  1. भारतीय संविधान के अध्याय 1 के भाग 12 के अनुसार संघ और राज्यों के बीच शुद्ध कर से प्राप्त आय का वितरण किया जाना।
  2. संविधान के अनुच्छेद 275 के अनुसार भारत सरकार कि संचित निधि से राज्यों को राजस्व अनुदान राशि का आवंटन।
  3.  राज्य की निधि को बढ़ाने की सिफारिश। 
  4. राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित किसी मामले का अनुसंधान और सिफारिश। 

महामहिम राष्ट्रपती द्वारा प्रदत्त शक्तियों के कारण किसी विशेष मामले में रिपोर्ट से सम्बन्धित पक्ष को गवाह के रुप में उपस्थित होने के लिए आदेश दे सकता है आयोग। जिन्हें उपस्थित होने के लिए समन भेजा गया है, उन्हें आयोग के समक्ष उपस्थित होना होता है इस कारण से अर्ध न्यायिक संस्था भी कहा जाता है। 

सदस्य - वित्त आयोग में अध्यक्ष समेत चार सदस्य होते हैं। दो सदस्य पूर्णकालिक और और सदस्य अंशकालिक होते हैं। 

वित्त आयोग का अध्यक्ष और सदस्य - 


वित्त आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों की नियुक्ति महामहिम राष्ट्रपति द्वारा की जाती है जो भारत सरकार को सिफारिश देने के साथ राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित कार्य करती है ऐसे में इसके सदस्य में निम्न योग्यता का होना अनिवार्य है - 
  1. सदस्य का उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रुप में योग्यता रखना। अथवा वित्त और अर्थशास्त्र का जानकार और अनुभवी होना आवश्यक। 
  2. महामहिम राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट और उनका आशीर्वाद बना रहना। 
  3. राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाना। 
  4. मानसिक दिवालिया या पागलपन का ना होना। 
  5. वेतन और भत्ते संविधान के नियमो के अनुरूप। 

अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति महामहिम राष्ट्रपती के आदेश पर होती है। आयोग को प्रदत्त शक्तियां भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अनुरुप राष्ट्रपति के आदेश के अनुरुप होती है। 

नवीन वित्त आयोग? 


वित्त आयोग भारत का एक संवैधानिक निकाय है,  आजाद भारत में प्रथम वित्त आयोग कि स्थापना 1951 में हुई और के सी नियोगी प्रथम अध्यक्ष थे। इसका प्रमुख कार्य केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देना है। अब तक के 15 वित्त आयोग भारत सरकार को राजस्व और वित्त सम्बन्धित सिफारिश प्रदान करने का अपना कार्य पूर्ण कर चुके हैं, वर्तमान में 16 वे आयोग कि स्थापना हुई है। 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह थे, जिसकी अवधि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक है। इस आयोग कि सिफारिश पर केंद्र के विभाज्य कर. (टैक्स) पूल को 41 प्रतिशत दिया। 

भारत सरकार नें अरविंद पनगढ़िया को 16 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष के रुप में कार्यभार दिया है। आयोग का गठन पांच साल की अवधि (2026-27 से 2030-31) के लिए किया गया है। अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व वाला आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट 31 अक्टूबर, 2025 तक भारत कि राष्ट्रपति महोदया को सौंपेगा। इस आयोग में इनके अतिरिक्त पूर्णकालिक सदस्य भारतीय अर्थशास्त्री और शिक्षाविद डॉ जगदीश भगवती शामिल हैं। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने 16वें वित्त आयोग के संदर्भ की शर्तों (टीओआर) को मंजूरी दी थी। वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच कर हस्तांतरण और राजस्व वृद्धि के उपायों का सुझाव देने के अलावा आपदा प्रबंधन पहल के वित्तपोषण की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा करेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल की सहमति के बाद महामहिम राष्ट्रपती ने आयोग का गठन कर लिया है जो अगले दो वर्ष में केंद्र और राज्य के बीच धन के आवंटन सम्बन्धित रिपोर्ट बनाकर महामहिम राष्ट्रपती को प्रस्तुत करेगा। 

डॉ अरविंद पनगढ़िया का परिचय ?

अरविंद पनगढ़िया का जन्म सन्न 1952 में बालू लाल पनगढ़िया के घर हुआ। इनके पिता श्री बाबू लाल जी ओसवाल (जैन समुदाय) से संबंध रखते थे। इनके पिताजी कई साल पहले भीलवाड़ा से जयपुर चले गए। भीलवाड़ा से जयपुर जाने के पश्चात मइनके पिताजी 'लोकवाणी' नामक समाचार पत्र का संपादन जयपुर से करने लगे। कुछ साहित्य पर ध्यान दिया जाए तो इनका उपनाम पनगढ़िया, जोधपुर के ओसियां के पानागढ नाम से पड़ा। इनके पिता ने समाचार पत्र के संपादन के साथ राजस्थान में स्वतंत्रता आंदोलन पर 'राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम' नामक निर्णायक कृति सहित कई पुस्तकें लिखीं। उनका जन्म राजस्थान के ओसवाल जैन समुदाय में हुआ था।

चित्रः अपनी पुस्तक के विमोचन के दौरान अरविंद पनगढ़िया जी। 

अरविंद पनगढ़िया कि प्रारम्भिक शिक्षा राजस्थान में होने के साथ ही परास्नातक की शिक्षा भी राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से हुई है। इसके बाद आगे की शिक्षा के लिए ये विदेश चले गए और इन्होंने विश्व के नामी विश्वविद्यालय प्रिंसटन विश्वविद्यालय, न्यू जर्सी, अमेरिका से अर्थशास्त्र विषय में पीएचडी की। पीएचडी के उपरांत ये विभिन्न विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्यापन की सेवाएं देते रहे। इन्होंने लंबे समय तक (वर्ष 1978 से 2003 तक) मेरीलैंड विश्वविद्यालय अमेरिका में अर्थशास्त्र विषय का अध्यापन किया। 
वर्तमान में भी ये विदेश मे अध्यापन से जुड़े हुए हैं। वर्तमान समय में अमेरिका के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्यापन के कार्य के साथ ही अरविंद पनगढ़िया को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और संस्थानों में कार्य करने का लंबा अनुभव है। इन्होंने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में समय-समय पर सेवायें दी है। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की सेवाओं में प्रमुख रुप से वर्ल्ड बैंक, अंकटाड और आईएमएफ में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के साथ एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री के रुप में कार्य करना।
 अरविंद पनगढ़िया जी ने भारत के कैबिनेट मंत्री के समान शक्ति रखने वाले योजना आयोग के उपाध्यक्ष (जनवरी 2015 से अगस्त 2017 तक) कार्य कर चुके है। तब इन्होंने G-20 में भारतीय शेरपा के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। 15 से अधिक अर्थशास्त्र विषय पर पुस्तके लिख चुके पनगढ़िया विभिन्न अंग्रेजी अखबारों में भी मासिक संपादकीय लिखे है। इनके कई शोध पत्र विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में छ्प चुके हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विभिन्न समितियों में भी इन्होंने समय-समय पर उल्लेखनीय सेवायें दी है। वर्तमान समय में भारत के आधुनिक विश्वविद्यालय (नालंदा, राजगीर, बिहार) में नामित कुलपति के रुप में सेवा दे रहे हैं। 

इनके अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विशेष योगदान को देखते हुए विभिन्न संस्थाओ द्वारा पुरस्कृत भी किया गया। भारत सरकार नें भी इनके अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य देखते हुए वर्ष 2012 मे इन्हें 'पद्म भूषण' (देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया गया। 

अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ ही इन्हें भारत में भी कार्य का अनुभव हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार के दौरान इन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में अपनी सेवाएं दी उनमे से नीति आयोग के उपाध्यक्ष (2015-2017) के रुप में सेवाएं देना सबसे अहम है। इसके अतिरिक्त भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) के सदस्य भी रहे।

चित्रः समाचार पत्रों में समाचारो में अरविंद पनगढ़िया जी। 

देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय के गवर्निंग बोर्ड से सदस्य रहे और वर्तमान में नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर (कुलाधिपति) है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च एंड एंड इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। पिछले वर्ष देश में हुई G20 मीटिंग के दौरान शेरपा के रुप में इन्होंने अपनी सेवाएं देश को दी। पूर्व में इन्होंने तुर्की (2015), चीन (2016) और जर्मनी (2017) की अध्यक्षता के दौरान G20 की मीटिंग में भारतीय टीम का नेतृत्व कर चुके हैं। 

ऐसे व्यक्ति को वित्त आयोग के अध्यक्ष के रुप में नियुक्त किया जाना ना सिर्फ इनके लिए बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए गौरव कि बात है। 

क्यो महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति? 

अरविंद पनगढ़िया जी मारवाड़ी समुदाय के व्यक्ति हैं, जो अर्थशास्त्र से जुड़े हुए हैं। इनका अर्थशास्त्र के क्षेत्र में देश विदेश में लंबा योगदान किया। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओ के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओ में कार्य कर चुके हैं। विभिन्न संस्थाओं के साथ कार्य करने के अतिरिक्त अध्यापन से भी जुड़े रहे हैं। यूं कहें तो अर्थशास्त्र में बहुआयामी अनुभव है इनके पास। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओ में भी सलाहकार के साथ ही विभिन्न पदों पर अपनी सेवायें दे चुके हैं। इनके अर्थशास्त्र के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यो और उपलब्धियों को देखते हुए ही भारत सरकार नें इन्हें 'पद्मभूषण' से एक दशक से पहले नवाजा हैं। 
अरविंद पनगढ़िया का संबंध मारवाड़ के जैन समुदाय से होने के कारण अर्थशास्त्र, वित्त और लोककल्याणकारी भाव विरासत से मिले हुए हैं। विरासत से ही व्यापार और वित्त के निवेश के गुणों के साथ लोक कल्याण के भाव के कारण ही उन ऊंचाई की उड़ान भरी जो साधारण परिवार में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए असंभव प्रतीत होती है। इन्हीं गुणों के चलते वित्त की बड़ी जिम्मेदारी इनके साथ ही देश के लिए अहम हो जाती है। ये अपनी विरासत और अनुभव के संयोजन से ऐसे बड़े और उल्लेखनीय फैसले लेंगे जो आने वाले समय में लोगों और देश के लिए नज़ीर साबित होंगे। 
प्रश्न 

पश्न - वित्त आयोग का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत होता है?

उत्तर - वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत होता है।

प्रश्न - 16 वे वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन है?

उत्तर - 16 वे वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया है।

प्रश्न - प्रथम वित्त आयोग का गठन कब हुआ?

उत्तर - प्रथम वित्त आयोग का गठन 1951 में तत्कालीन कानून मंत्री बी आर अंबेडकर द्वारा की गई।

प्रश्न - प्रथम वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर - प्रथम वित्त आयोग के अध्यक्ष के सी नियोगी थे।

प्रश्न - वित्त आयोग का गठन किसके द्वारा किया जाता है?

उत्तर - वित्त आयोग का गठन भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। 

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