तालाब: सौंदर्य और महत्व। Beauty of Pond

तालाब: सौंदर्य और महत्व। Beauty of Pond

भूमि से घिरा हुआ एक छोटा जलाशय तालाब कहलाता है। इसकी गहराई और क्षेत्रफल झील के मुकाबले में थोड़ा छोटा होता है और सूर्य कि किरणें निर्बाध रूप से पानी तक पहुंच जाती है। सामन्यतः इसकी कोई विशेष परिभाषा और माप नहीं है, जो इसे झील, सरोवर या नाडी से अलग कर सके। किंतु यह झील से थोड़ा छोटा होता है और जमीन से घिरा हुआ होता है, यह इसे झील से अलग करता है।

तालाब: सौंदर्य और महत्व। Beauty of Pond



एक गड्डे नुमा जगह जब पानी से भर जाती है तो इसे हम तालाब कहते हैं। इस प्रकार के गड्डे प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों रुप के हो सकते हैं। यूनाइटेड किंगडम में चैरिटी पॉण्ड कन्ज़र्वेशन नामक संस्था की परिभाषा के अनुसार 'तालाब एक कृत्रिम या प्राकृतिक जलाशय है, जो एक वर्ग मीटर या 2 हेक्टेयर भूमि पर फैला हुआ होता है, ऐसे जलाशय में कम से कम चार माह तक पानी भरा हुआ रह सकता है।' 

तालाब: मनमोहक सौंदर्य - 


तालाब प्रकृति का अनुपम सौंदर्य अपने मे समेटे हुए होते हैं। प्रकृति का अद्भूत नज़ारा यहां देखने को मिलता है। तालाब के आस पास हरे भरे पेड़ों का झुरमुट, रंग-बिरंगे पक्षियों के झुंड, वन्य और जलीय जीव इसे और अनुपम और मनमोहक बनाते हैं। इसके किनारों की घास किसी उद्यान के समान सौंदर्य और अनुभूति इस प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने वालों को देती हैं। किनारों लगे फ़ूलों के पौधे और उनके आसपास मंडराती तितलियों का समूह यहां का नजारा देखने वालों का मन मोह लेता है। 

तालाब का स्वच्छ जल उसमे तैरते जलीय जीव, उछल-कूद कर लहरों पर गोते लगाते बतख। हरे-भरे पेड़ों के झुरमुट कि जमीन को छूती डालिया हरियाली की छटा बिखेरती है तो उन पर बैठे रंग-बिरंगे पंछी आँखों को सुकून देते हैं। साफ पानी कि हवा के साथ लकीर की भांति दिखती लहरे बिजली की लड़ी वाले लट्टूओं कि भाँति नजर ही नहीं टिकने देती। किनारे रंग बिरंगे फूल और उनमे स्वच्छन्द विचरण करते वन्य-जीव और उनके सौंदर्य को देखकर देखने वालों का मन भर जाता है। पुराने जमाने के बने तालाबों की पाल पर बनी पुरानी हवेलियां मन मोह लेती है। 

तालाब: शांतिपूर्ण वातावरण - 


आज दौड़भाग भरी जिंदगी में शांति का क्या मोल है? आप भली-भांति जानते ही हैं। आदमी शांति की तलाश में कहाँ-कहाँ नहीं भटकता है? आज इंसान शांति के लिए कभी इंसान से दूर भागता है तो कभी शहरों की चकाचौंध से। दुनिया के बदलते स्वरुप में आदमी इतना उलझ गया कि लाखों की भीड़ में खुद को ही नहीं तलाश पाता है तो शांति कहाँ तलाशे? दिल की शांति, दिमाग की शांति और भीतर की शांति इस कृत्रिम दुनिया में मिलना मुश्किल काम है। मन, दिल और मस्तिष्क को शांति देने के लिए मनुष्य प्राकृतिक माहौल को ढूँढता है। 

प्राकृतिक रुप से तालाब के आसपास बेहद शांत माहौल होता है। शांत जल में उठती लहरे प्राकृतिक और मधुर (स्थिर) ध्वनि की शांति से दिल को सुकून देती हैं। आसपास के पेड़ों से से पक्षियों की मधुर आवाज शांति देती है। प्राकृतिक सौंदर्य के माहौल में पहुंचा व्यक्ति खुद को ही भूल जाता है तो उसे अपने-आप ही एक अजीब शांति की अनुभूति होती हैं। 

तालाब: मनोरम माहौल - 


माहौल किसी विशेष जगह कि स्थिति या मनोदशा है। जगह की बनावट, शांति, दृश्य, ध्वनि, गंध और संवेदनाओं से माहौल का निर्माण होता है। माहौल एक परिस्थिति अथवा वातावरण है, जो स्थिति को खुशनुमा बनाता है। माहौल किसी जगह की तर्कसंगत और वास्तविक स्थिति होती है। मन को सुहाने वाला दिल को तसल्ली देने वाला माहौल मनोरम माहौल होता है, जो मनुष्य के तन-मन को शांत कर सके। 

तालाब: सौंदर्य और महत्व। Beauty of Pond



तालाब के आसपास प्राकृतिक और खुशनुमा मनोरंजन दायी मनोरम नजारा होता है। मन को सुकून देने वाले इस दृश्य में बतख जलीय जीव पकड़ने के लिए गोते लगाते, फूलों से आती महक पेड़ों की छाया और बहती ठण्डी हवाएं। कलरव करता पक्षियों का झुंड, हवा से बातें करती तितलियां नयनप्रिय माहौल बनाती हैं। जल पीते जीव और जलीय जीवों का शिकार कर भरण-पोषण करने वाले पक्षियों की आंख-मिचौली और जीवन का संघर्ष। 

राजस्थान के प्रमुख तालाब के उदाहरण - 


राजस्थान मरूस्थल है। राजस्थान ने हमेशा से पानी की कमी को झेला है। पानी की कमी को दूर करने के लिए राजा - महाराजा, प्रजा, सेठ-साहूकारों ने समय-समय पर कुएं, बावड़ी और तालाब बनाये। ऐसे में राजस्थान में अनुपम और मन को मोहने वाले अनूठे तालाबों के कई उदाहरण है। उनमे से कुछ उदाहरण निम्न है -
जिला  तालाब का नाम 
चित्तौड़गढ़  -सूर्य कुंड 
गौमुख कुंड 
भीलवाड़ा  सरेरी तालाब 
सवाईमाधोपुर  सुख तालाब (रणथंभौर) 
रानीहाङ तालाब (रणथंभौर) 
पद्मतला तालाब (रणथंभौर) 
उदयपुर  बागोदिया तालाब 
दूध तलाई 
धौलपुर  मच कुंड 
झुंझुनूं  पन्नालाल शाह का तालाब (खेतड़ी)
अजित सागर तालाब (खेतड़ी) 
 बारां  नवलख तालाब 
माला की तलाई 
अलवर  नारायणी माता तालाब 
तालवृक्ष कुंड 
पाली  हेमा वास तालाब 
मुथाना तालाब 
जोधपुर  भाटेलाई (बालेसर) 
चूरू  सेठानी का जोहड़ा
पथरीला जोहड़ा 
नागौर  ज्ञान तालाब (मूण्डवा) 
शुक्र तालाब 
बूंदी  नागर-सागर 
कीर्ति तालाब जैतसागर तालाब 
सिरोही  कपूर सागर 
डूंगरपुर  एडवर्ड सागर 

राजस्थान के अतिरिक्त भारत में भी कई भ्रमण योग्य तालाब हैं। इनमे बड़ा तालाब, भोपाल। मोती सागर (आगर मालवा, मध्यप्रदेश), रानी तालाब (रीवा, मध्यप्रदेश), सागर (सागर, मध्यप्रदेश) गोविंदगढ़ (रीवा, मध्यप्रदेश) आदि। देश में सर्वाधिक तालाब पश्चिम बंगाल में तथा सबसे कम सिक्किम राज्य में है। 

 तालाब और अर्थव्यवस्था - 


पहले जहां तालाब का उपयोग मनुष्य और पशु-पक्षियों के पीने के पानी के लिए परंपरागत रुप से होता था। वहीं अब तालाबों का उपयोग कृषि कार्यो के साथ मछली पालन, पशु पालन और भूमि में जल रिचार्ज करने के लिए हो रहा है। भारत सरकार सिंचाई, मछली पालन और भूमि जल स्थिरीकरण के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। इनके अतिरिक्त खारे पानी के तालाब से नमक का उत्पादन किया जाता है। इसके आर्थिक उपयोग इस प्रकार है - 

  • कृषि कार्य - कृषि कार्य और सिंचाई करने के लिए किसान तालाब के जल का उपयोग खेतों में पानी देने के लिए करते हैं, साथ ही जलीय कृषि यथा सिंघाड़े, कमल, कुटु और मखाने आदि की फसल लगाई जा सकती है। 
  • पशुपालन - पशुपालन करने वाले किसान अपने पशुओं को तालाब में पानी पिलाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकते हैं। तालाबों का परंपरागत उपयोग भी पशुओं को पानी पिलाने के लिए किया जाता था। 
  • मत्स्य पालन - जलीय कृषि, सिंचाई और पशुपालन के अतिरिक्त लोग अपने खेतों में या सार्वजनिक तालाबों में मत्स्य पालन कर सकते हैं। तालाबों में वानस्पतिक संतुलन और प्राकृतिक संतुलन बना रहने से मत्स्य पालन करने वाले किसानो/मछुआरों को काफी लाभ होता है। 
  • जल स्थिरीकरण - जल का स्थिरीकरण करने से गांवों और आसपास के खेतों में भूजल की कमी नहीं होती जिससे आसानी से सिंचाई का जल मिल जाता है और उपज अधिक होती है, जिससे किसानो को लाभ होता है। 
  • नमक का उत्पादन - जहाँ खारा पानी होता है, वहाँ तालाब का निर्माण कर नमक का उत्पादन किया जा सकता है। 


तालाब और पारिस्थितिकी संरक्षण - 


तालाब जहां एक ओर अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका निभाते हैं, वहीं दूसरी ओर पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत कर जैव-विविधता को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। गांवों और कस्बों में बने तालाब उस क्षेत्र विशेष के जीव, पौधे, जानवर और अनुजीवों को संरक्षित करने मे अविचलित योगदान देते हैं। यह विभिन्न जीव समुदायों का वहाँ के वातावरण के साथ अनुकूलन स्थापित कर उन्हें बचाने में मदद करते हैं। 

आपने चिड़िया, कौवे और अन्य पक्षियों को पानी पीते हुए देखा होगा। ये सभी पक्षी खुले और भूमि पर बने जलाशयों से पानी पीना अधिक पसंद करते हैं, ऐसे में तालाब गांवों में इन्हें पानी पीने और जलीय जीवो को भोजन के रुप में प्रस्तुत कर इन्हें बचाने में सहयोग करता है तो दूसरी ओर जलीय जीवो को भी पनपाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करता है। ऐसे ही कई वन्य जीवों और पौधों को भी बचाने में अपना सहयोग करता है। 

तालाब का भ्रमण - 


तालाब बहुत सुन्दर स्थान होता है उस कारण इसका भ्रमण भी किया जा सकता है। तालाब के भ्रमण के लेख भी लिखने को कहा जा सकता है, ऐसे में आइये कुछ चर्चा करते हैं तालाब भ्रमण की। 

मुझे आज भी याद है जब हम बचपन में स्कूल के बाद सीधे तालाब की ओर निकल जाते थे। काफी दूर से ही तालाब की पाल साफ दिखती थी और उस पाल पर पीपल, बरगद, खेजड़ी और इमली के पेड़ों का झुरमुट दूर से ही साफ दिखता था। सभी बच्चे उस झुरमुट को निशाना बना उसी तरफ चल देते थे। पाल पर जैसे ही पहुंचते तो जल भरते कुछ लोग दिख जाते जो वहीं रुकने का निर्देश दे देते थे। हमे बुरा लगता था लेकिन धीरे-धीरे समझ आने लगा कि छोटे बच्चों को अकेले पानी के पास नहीं जाना चाहिए सुरक्षा की दृष्टि से और साथ ही तालाब पर गंदगी नहीं करनी चाहिए। खैर हम तो पाल पर ही बैठकर मनोरम दृश्य का लुप्त उठाते थे। 

तालाब के साफ पानी की लहरे हवा के साथ यूँ लगती हैं जैसे पानी निरंतर बह रहा है और कोई कलाकृति का निर्माण कर रहा हो। पानी पर छलांगे लगाते कई प्रकार के पक्षी और हवा में उड़ती तितलियां दृश्य को मनोरम बनाती। हमारे दूर खड़े रहने से वन्य जीव भी आसानी से तालाब में पानी पीने आ जाते थे। उन्हें भी देखने का मनोरम दृश्य देखने को मिल ही जाता था। पेड़ों की ठण्डी छांव और ठण्डी हवा इतना आनंद भर देती की पानी की लहरों में भी संगीत सुनाई पड़ता और उड़ते पंछी का कलरव गाना। पानी भरने आती महिलाएं रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर आती तो ऐसा लगता कि संसार के सभी रंग यही बिखरे हुए हैं। 

तालाब के पास घास की अधिकता के कारण कई प्रकार के जीव वहाँ निवास करते हैं जिनके चलते वहाँ अधिक आवाज नहीं करनी चाहिए और ना ही उनके लिये कोई खतरा बने इसके लिए हम वहाँ का दृश्य निहारने के बाद घर को लौट जाते लेकिन मन को जो सुकून मिलता उसके लिए शब्द नहीं होते थे इसी के कारण बार-बार हम खिंचे चले जाते थे तालाब पर। जब भी फिर जाते तो हर कोई अपना पिछला अनुभव बताता कि उसने पिछली बार कौनसी नई चिड़िया देखी या उसका कोई विशेष करतब देखा फिर होता उसके उस करतब का इंतजार। आज भी हमे याद है कि कैसे वो पंछी अब देखने को नहीं मिलते जो बरसों पहले यूँ ही दिख जाते थे। 

अन्य आवश्यक प्रश्न - 


प्रश्न - तालाब किसे कहते हैं?

उत्तर - चारो और पृथ्वी से घिरा ऐसा जलाशय जहां सूरज की किरणें आसानी से पहुंच सके। यह झील से थोड़ा छोटा होता है। यहां वर्षा या अन्य तरीके से एकत्रित हुआ पानी कम से कम 4 महिने तक रह सकता हो। 

प्रश्न - तालाब के पर्यायवाची शब्द बताइए। 

उत्तर - जलाशय, सर, सरोवर, पोखर, जोहड़ा, पुष्कर, जलवान, सरसी, ताल।

प्रश्न - मछली पालन के लिए तालाब की गहराई कितनी होनी चाहिए?

उत्तर -  मछली पालन के लिए तालाब की गहराई कम से कम 6 फीट की होनी चाहिए, इसमे नित्य पानी भरा हुआ होना चाहिए। 

प्रश्न - सिंघाड़े की खेती के लिए तालाब की गहराई कितनी होनी चाहिए? 

उत्तर -   3-4 फीट गहरे गड्डे या तालाब में सिंघाड़े की खेती आसानी से की जा सकती है, इसमे सदैव पानी भरा हुआ होना चाहिए। 

प्रश्न - कमल की खेती के लिए तालाब की गहराई कितनी होनी चाहिए? 

उत्तर -   1-2 फीट गहरे गड्डे या तालाब में कमल की खेती आसानी से की जा सकती है, जिसमे कीचड़ की मात्रा भरपूर चाहिए। 

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