कुमट का पेड़ : कुमटिया के पेड़ और बीज और गोंद। Kumatiya ki Sabji

कुमट राजस्थान का एक वानस्पतिक पेड़ है। इस मरुस्थलीय पेड़ पर जो फलियां लगती है, उन्हें तोड़ने पर जो बीज निकलते हैं, उन्हें कुमटिया या हिलारिया कहा जाता है। राजस्थान में कुमटिया का उपयोग सब्जी बनाने के लिए किया जाता है। कुमटिया भूरे (हल्का काला और लाल) रंग का गोल बीज होता है। इसके बीज की त्रिज्या लगभग 2 सेमी. होती है यानी बीज का व्यास 4 सेमी के लगभग होता है। कुमट के पेड़ को राजस्थान के कुछ हिस्सों में कुंभट भी कहा जाता है। 

वैज्ञानिक वर्गीकरण - 

तथ्य स्पष्टीकरण 
जगत पादप (plant) 
वंशसेनेगलिया (Senegalia) 
जाति सेनेगल (Senegal) 
वैज्ञानिक नाम अकेसिया सेनेगल ( Aceasia Senegal) 

कुमट का पेड़ 

कुमट का पेड़ बबूल (aceasia) कुल का पेड़ है। यह 4-8 मीटर का पेड़ होता है। इसका तना हल्के पीले (धूसर) रंग का होता है। कुमट के पत्ते पूर्ण छोटे-छोटे और गर्मियों में सूख जाने के कारण यह पेड़ पूर्ण रुप से मरुस्थली पेड़ है। इसके पत्ते छोटे (देशी बबूल के समान) होते हैं, जो पशुओं के चारे के लिए उपयुक्त होते हैं, जो गर्मियों में पत्ते झड़ जाते हैं। इसके पत्ते बकरियों आसानी से खा सकती हैं। कूमट की लकड़ी घरेलू कार्यो में उपयोग किए जाने औजारों (हाथ चक्की की कील, मूसल और कृषि औजार) में उपयोग ली जाती है, इसके साथ ही रसोई में खाना बनाने के लिए भी उपयोग की जाती है। कूमट के पेड़ से उत्तम श्रेणी का खाने योग्य गोंद प्राप्त किया जाता है। 

कुमट सूडान और नाइजीरिया में बहुतायत पाया जाता है। यह अर्द्धशुष्कीय, कंकरीली और पथरीली भूमि इसके लिए उपयुक्त होने के कारण यह भारत में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र में पाया जाता है। मरुस्थलीय वृक्ष होने के कारण इसे खेतों की मेड़ पर मृदा अपरदन को रोकने के लिए लगाया जाता है। साथ ही ओरण और अरण्य भूमि पर प्रदेश की जैविक संपदा और जैव विविधता को बचाने और संरक्षण के लिए कुमट के पेड़ लगाये जाते हैं।

कुमट या कुमटिया की सब्जी बनाने का तरीका - 

कुमट के पेड़ पर लगने वाली फली से कुमट के बीज (कुमटिया या हिलारिया) निकालकर सब्जी बनाने के काम में लिए जाते हैं। इसकी सब्जी गिले और सूखे दोनों प्रकार के बीजों से बनाई जा सकती हैं। गिले कुमटिया के बीज को फली से निकालने के बाद साफ करके सब्जी बनाई जा सकती हैं तो सूखे कुमटिया को उबालकर सब्जी बनाई जाती है। सूखे बीजों को लंबे समय तक संरक्षित करने के लिए साफ करने के पश्चात्‌ गर्म पानी में नमक डालकर उबाल लिया जाता है ताकि इनमे घुण (जीव) ना पड़ सके। 

सूखे कुमटिया की सब्जी बनाने के लिए जिस दिन सब्जी बनानी है, उसकी पहली रात को पानी को गर्म कर कुमटिया के बीज उसमें डालकर रख दीजिए ताकि अच्छी तरह से मुलायम हो जाए, अन्यथा पानी में उबालकर मुलायम करे ठीक उसी प्रकार जैसे राजमा को मुलायम किया जाता है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया से पूर्व निम्न सामग्री तैयार कर लीजिए। 

सामग्री
(प्रति 50 ग्राम गुंदा) 
मात्रा 
तेल 1-2 टेबल स्पून 
हल्दी पाउडर आधा छोटा चम्मच 
जीरा आधा छोटा चम्मच
धनिया 1 छोटी चम्मच 
मिर्ची पाउडर 1 छोटी चम्मच 
अमचूर  पाउडर आधा छोटा चम्मच
हींग थोड़ी सी (आधी) 
सौंफ 1 चम्मच 
अजवाइन आधा छोटा चम्मच
नमक स्वादानुसार 
मैथी स्वादानुसार 

यहाँ ध्यान दीजिए कुमटिया के बीज को अधिकतर पंचकुटा में ही प्रयोग किया जाता है। लेकिन कुमटिया की कड़ी भी बहुत बढ़िया बनती है। इसलिए इस सामग्री का उपयोग करते हुए आप कड़ी भी बना सकते हैं, इसके अतिरिक्त केवल सांगरी के साथ भी सब्जी बना सकते हैं। 

इसके लिए आप कड़ाई या तपेली अथवा भगोने में तेल डालकर गर्म होने होने पर मसालों का चमका दे दीजिए। जब मसाले पक जाए तो कुमटिया और सांगरी पांच मिनट पकने दे और कड़ाई को स्टोव से निचे रखकर दही डाल दीजिए। अब सब्जी खाने के लिए तैयार हो चुकी है। इसे आप रोटी के साथ खा सकते हैं।

कब और कहाँ मिलता है, कुमटिया? 


कुमटिया के बीज बाजार में सूखे मेवे मिलने वाली दुकान पर आसानी से मिल जाते हैं, राजस्थान में। अन्य राज्यों में भी किराने की दुकान के साथ आजकल ऑनलाइन भी मिल जाते हैं, क्योंकि ये लंबे समय तक दाल की भांति संरक्षित किए जा सकते हैं, इस कारण कहीं भी मिल सकते हैं, जहां राजस्थानी अन्य केर सांगरी मिलती हैं। 

गिले कुमटिया के बीज जनवरी-फरवरी मास में मिलते हैं। कुमट के पेड़ों पर सर्दी की शुरुआत में ही पुष्प खिलना शुरु होते हैं, जिसे स्थानीय लोग 'मिंझर' कहते हैं। जनवरी-फरवरी में फलियां लगती हैं। जिसके कारण गिले कुमटिया उसी समय मिलता है, जो बाजारों में नहीं मिल सकता है, बाजार में केवल सूखे बीज ही मिलते हैं। 

कुमटिया के बीज और गोंद के सेवन से फायदा - 


कुमट के पेड़ पर कुमटिया के साथ गोंद भी लगता है। कुमट से प्राप्त होने वाले गोंद को 'अरेबिक गोंद' कहा जाता है। अरेबिक गोंद की 90% प्राप्ति सूडान से होती हैं। इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवा, खाने-पीने के उत्पादों के साथ उद्योगों में भी उपयोग होता है। कुमट के पेड़ से अधिक गोंद की प्राप्ति के लिए केंद्रीय शुष्क अनुसंधान केंद्र (काजरी), जोधपुर द्वारा बनाये गये इथेफाॅन हार्मोन का टीका (जमीन से 1 फीट ऊपर 6 इंच का छेद कर) इंजेक्शन द्वारा लगाया जाता है, जिससे 500 ग्राम प्रति पेड़ गोंद की उत्पादकता बढ़ जाती हैं। कभी तने में तिरछा छेद कर उसमे भी हार्मोन को भरा जा सकता है। इसके गोंद और कुमटिया के सेवन से कई फायदे होते हैं, जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। 

कुमटिया बीजों के सेवन से फायदे - 


कुमट के बीज यानी कुमटिया में कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं इनका सब्जी या अन्य तरीके जैसे चाट और कड़ी के माध्यम से सेवन करने से हार्ट, लिवर, गुर्दे और यकृत के लिए फायदेमंद होती हैं। इन्हीं गुणों को देखते हुए कुमट के बीजों का उपयोग आयुर्वेदिक दवा में होता है।  आंत की विकृति को ठीक करने में इसका भरपूर उपयोग होता है, अधिकांश आयुर्वेद की आंत की दवा में इसका मिश्रण पाया जाता है। बीज की चिकनाई के कारण उद्योगों में साबुन बनाने वाली कंपनियां कच्चे माल के तौर पर भी उपयोग करती हैं। 

कुमट के गोंद के सेवन से फायदे - 


कुमटिया के गोंद में प्रोटीन, विटामिन, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती हैं, जिसके कारण इसका सेवन भी बहुतायत होता है। राजस्थान में प्रसव के बाद महिलाएं इसका उपयोग लड्डू बनाने के लिए करती हैं। पुरुष भी सर्दियों में कुमट के गोंद के लड्डू इसमे उपलब्ध भरपूर कैल्शियम और अन्य फायदों को देखते हुए खाते हैं। भारत में गम की गुणवत्ता निर्धारित करने वाली एजेंसी 'फारमेकोपिया ऑफ इंडिया' के अनुसार कुमट का गोंद पूर्ण रुप से खाद्य और मानकों पर खरा है। इसके कुछ फायदे निम्न है - 

  • आयुर्वेदिक दवा - प्रोटीन और विटामिन के गुण होने के कारण आयुर्वेद में इनकी दवा में गोंद का प्रयोग होता है, साथ ही लोग भी इन्हीं फायदों को देखते हुए इसके लड्डू बनाकर खाते हैं। 
  • प्रसव के बाद दूध को बढावा - प्रोटीन की भरपूर मात्रा होने के कारण प्रसव के बाद महिलाओं द्वारा गोंद के लड्डू बनाकर खाए जाते हैं, जिससे दूध की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शिशुओं को कुपोषण का शिकार होने की संभावना कम हो जाती है। 
  • रीढ़ की हड्डी को मजबूती - कुमट के गोंद में कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है, जिसके कारण हड्डियां मजबूत होती है। खासतौर से रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करने के लिए इसका सेवन बहुतायत होता है। 
  • उद्योगों में गोंद का उपयोग - कपड़ा, कागज, चर्वण निर्यात, खाद्य सामग्री और सौंदर्य सामग्री में उपयोग किया जाता है। 
उपर्युक्त सभी कुमट के गोंद और बीज के फायदे होने के कारण लोग ऊंची कीमत देकर बाजारो से खरीद कर उपयोग करते हैं। केंद्रीय शुष्क अनुसंधान केंद्र, जोधपुर भी इसे बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। 


किसान को कुमट से आर्थिक मजबूती - 

कुमटिया के पेड़ को मूल रुप से मेड़ पर मृदा के अपरदन को रोकने के लिए लगाया जाता रहा है। इसकी लकड़ी का प्रयोग रसोई में ईधन के अतिरिक्त कृषि और घरेलू औजारों के हत्थो को बनाने के रुप में किया जाता रहा है। पहले कुमट के बीज और गोंद का घरेलू उपयोग होता था। वर्तमान में, बाजार में दोनों को अच्छे दाम में बेचा जा सकता हैं। 

बाजार में कुमट के सूखे बीजों को कभी भी बेचा जा सकता है। इसके लिए कोई नियत समय नहीं वैसे ही गोंद को भी कभी भी बेचकर नकद कमाई जा सकती है। गोंद की मात्रा को बढ़ाने के लिए काजरी का टीका सर्वोत्तम उपाय बन जाने से आय में वृद्धि हुई है। दूसरी ओर इसकी लकड़ी का उपयोग ईधन के तौर पर होने से ईधन की लकड़ी के लिए जमीन के घेराव को कम किया है। दूसरी तरफ कुमट के पेड़ घने और कांटेदार होने के कारण इसकी टहनियों का उपयोग खेतों के चारो ओर बाड़ बनाकर जंगली और आवारा पशुओं से रक्षा की जा सकती हैं।

कुमट के सूखे बीजों को बाजार में 100 रुपये प्रति किलो और गोंद को 1000 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाता है, जिससे किसानो को अतिरिक्त आय की प्राप्ति होती है। 

आवश्यक प्रश्न -


प्रश्न: कुमट का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?

उत्तर: कुमट या कुमटिया का वैज्ञानिक नाम अकेसिया सेनेगल है।

प्रश्न: कुमट में गोंद कहाँ पाया जाता हैं?

उत्तर: कुमट में गोंद तने और शाखाओं पर वहाँ लगता है, जहां घाव के निशान होते हैं, इसके लिए किसान कुल्हाड़ी से निशान बनाते हैं ताकि अधिक गोंद का उत्पादन हो सके। 

प्रश्न: राजस्थान में गोंद के लिए सबसे अच्छा वृक्ष कौनसा हैं?

उत्तर: कुमट। इसके अतिरिक्त सालार भी। 

प्रश्न: खाने के लिए सबसे उत्तम गोंद किस वृक्ष का होता है?

उत्तर: कुमट। 

प्रश्न: कुमट का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?

उत्तर: कुमट। 

प्रश्न: लड्डू बनाने के लिए किस पेड़ का गोंद काम में लिया जाता हैं?

उत्तर: कुमट के पेड़ के गोंद से लड्डू बनाये जाते हैं। 

प्रश्न: महिलाएं गोंद के लड्डू क्यों खाती हैं?

उत्तर: महिलाएँ प्रसव के बाद गोंद के लड्डू दूध की मात्रा को बढ़ाने के साथ शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति के लिए खाती है। 

प्रश्न: पुरूषों को किस पेड़ का गोंद खाना चाहिए?

उत्तर: पुरुषों को कुमट के पेड़ का गोंद खाना चाहिए क्योंकि इसमे प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन के साथ कई आयुर्वेदिक गुण मौजूद होते हैं। 

प्रश्न: कुमट के पेड़ भारत में कहाँ पाया जाता हैं?

उत्तर: कुमट का पेड़ भारत में मरुस्थल क्षेत्रों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है। 

प्रश्न: कुमट के बीजों का क्या उपयोग हैं?

उत्तर: कुमट के बीजों का उपयोग सब्जी बनाने के साथ आयुर्वेदिक दवा में है। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ