राजस्थान के महलनुमा सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल : स्वामी विवेकानंद स्कूल

राजस्थान प्रदेश में स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्रदान करने वाले सरकारी स्कूल है। केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज़ पर शिक्षा देने के लिए राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के कार्यकाल में राजस्थान में अंग्रेजी माध्यम में प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोला गया। शुरुआत में इन विद्यालयों में कक्षा 6-12 तक शिक्षा दी जाती थी, वर्तमान में इन स्कूल के पास प्राथमिक शिक्षा के लिए नर्सरी से पांचवी तक के विद्यालय भी खोले गए हैं।
स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल अतिआधुनिक स्कूल है। महलनुमा के साथ ही हाई-टेक लेब, वर्चुअल और स्मार्ट कक्षा-कक्ष, सीसीटीवी केमरा, इंग्लिश लैब, वाई-फाई विद्यालय परिसर, प्रोजेक्टर, साफ और स्वच्छ जल के लिए वाटर आरओ, आर्ट एंड क्राफ्ट रुम, सेंट्रलाइज्ड साउंड सिस्टम। नवोदय विद्यालय की भांति वातावरण देने के लिए वैज्ञानिक नवाचार के लिए नीति आयोग द्वारा संचालित अटल टिकरिंग लेब और अभियांत्रिकी को बढावा देने वाले गणित के लेब आदि। छोटे बच्चों के लिए भाषा और गणित की लेब और परिसर में झूले और खेलने की व्यवस्था।

स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल: अति आधुनिक सरकारी स्कूल - 


स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल सरकारी स्कूल है। केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर राजस्थान सरकार द्वारा गरीब तबके के लिए शुरु किये गये। जिन परिवारो की पहुंच बेहतर निजी स्कूलों तक नहीं है उनके बच्चों को निजी स्कूल जैसा वातावरण देने और केंद्रीय विद्यालयों के समान पाठ्यक्रम। शैक्षिक पाठ्यक्रम के साथ पाठ्येतर गतिविधियों का अद्वितीय संयोजन। वर्ष में चार बार भ्रमण, ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय हाॅबी क्लासेस। शिक्षा की अनूठी व्यवस्था के कारण ही अपने कुछ ही वर्षों के सफर के बावजूद कई विद्यालयों के पूर्व विद्यार्थी मेडिकल और देश के सर्वश्रेष्ठ अभियांत्रिकी कॉलेज (आईआईटी) कॉलेज में अध्ययन कर रहे हैं। देश के सर्वश्रेष्ठ कॉलेज में प्रवेश के लिए भी विद्यालय का स्टाफ तैयारी करवाता है इसी के कारण ये महलनुमा विद्यालय अपने भवन की भव्यता के साथ ही गुणवत्ता की कसौटी पर भी खरे उतर राज्य का गौरव बढ़ाया है। 

स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों के संचालन में होने वाला व्यय शत-प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है। इनके संचालन के लिए वित्तीय जिम्मेदारी राजस्थान सरकार की होने के कारण नियंत्रण और नियमन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। राज्य भर में ब्लॉक स्तर पर कुल 134 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति राज्य सरकार के नियमो के अधीन है। नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश शुल्क 500/-रुपये के साथ प्रति छात्र प्रतिवर्ष रुपये 500/- सालाना विकास शुल्क वसूल किया जाता है। पुस्तके राज्य सरकार की ओर से निःशुल्क वितरित की जाती है।

स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल - बालिका शिक्षा 


स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल (Swami Vivekanand Model School) में बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। मॉडल स्कूल में कुल सीटों में से 55% सीटों पर बालिकाओं के लिए आरक्षित है। कक्षा 6 से 10 तक दूर से आने वाली बालिकाओं को प्रवेश के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही आवागमन को आसान करने के लिए ट्रांसपोर्ट दिया जाता है। बालिकाओं को कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़े यह ध्यान में रखते हुए विद्यालय में निःशुल्क नेपकीन वितरण के साथ वस्त्र बदलने और उपयोग किए गए नेपकीन को नष्ट करने की सुविधा दी जाती हैं। 10 वी कक्षा की बोर्ड परीक्षा में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बालिका को चार वर्ष तक विदेश में पढ़ने का अवसर प्राप्त होता है, जिसका संपूर्ण खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। 

विद्यालय में दूर-दराज से आने वाली बालिकाओं को प्रोत्साहन देने के लिए कई विद्यालयों में बालिका हाॅस्टल खोले गए है तथा जहां अब तक खुले नहीं है, वहाँ खोले जा रहे हैं। मॉडल स्कूल में बने होस्टल में 25 कमरे है, जिनमे कुल 100 (एक कमरे में 4 बालिका) बालिकाएं रह सकती है। एक वॉर्डन और एक रसोइया राज्य सरकार कि और से नियुक्त किया गया है, जिसके कारण हॉस्टल में रहने के साथ ही खाने-पीने की व्यवस्था भी राज्य सरकार की तरफ से निःशुल्क है। 

स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल: शिक्षा और शिक्षक 


पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल का संचालन और वित्त पोषण राजस्थान की प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है, किंतु इनकी स्थापना केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर किए जाने के कारण इन सभी विद्यालयों की संबंधता केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड  (सीबीएसई) से है। सीबीएसई की संबंधता के साथ ही विद्यालयों का संचालन अंग्रेजी माध्यम में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण पारिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम के अनुरुप किया जाता है। केंद्रीय विद्यालयों के समान डिजिटल शिक्षा को भी अपनाया गया है। लेकिन यहां विशेष रुप से ध्यान दिया जाए कि केंद्रीय विद्यालयों की तरह सभी विद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा नहीं है। कुछ विद्यालयों में 100 छात्राओं के लिए हाॅस्टल की सुविधा हैं। 

विद्यालयों में शिक्षको की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में नियुक्त कार्मिकों को ही राजस्थान स्कूल शिक्षा पारिषद कार्यालय (Rajasthan Council of School Education) द्वारा इंटरव्यू के पश्चात्‌ किया जाता है। शिक्षकों की नियुक्ति दो वर्ष के लिए की जाती है, सेवाओं के संतोषजनक नहीं होने पर समयावधि पूर्व नियुक्ति रद्द किए जाने के कारण शिक्षक अन्य सरकारी विद्यालयों की तुलना में अधिक समर्पित होते हैं। सरकारी कार्मिक होने के बावजूद सरकार द्वारा सरकारी कार्मिकों से अधिक प्रोत्साहन और भत्ता देय होता है साथ ही किसी शिक्षक द्वारा एक मॉडल स्कूल में पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने के पश्चात्‌ इच्छुक जगह (शिक्षक द्वारा चाहे गए जिले में) पर स्थानांतरित किये जाने के कारण शिक्षको को अधिक समर्पित बनाता है, उसी का परिणाम है विद्यालयों का अन्य सरकारी विद्यालयों के मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन।  

स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल: प्रवेश प्रक्रिया - 


स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में नए प्रवेश सामन्यतः फरवरी महीने के अंतिम सप्ताह में शुरु हो मार्च के प्रथम सप्ताह तक (कुछ आगे - पीछे संभव) फॉर्म भरने की प्रक्रिया चलती हैं। जिन बच्चों को विद्यालय में प्रवेश लेना है वे स्वयं या उनके परिजन कार्यालय समय (8:30 से 3:30) में विद्यालय कार्यालय से निःशुल्क फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। कुछ विद्यालय की वेबसाइट पर भी फॉर्म उपलब्ध है, आप वहाँ से भी फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। फॉर्म को पूरा भरने के बाद मांगे गए सभी आवश्यकता दस्तावेज (बच्चे और अभिभावक की पासपोर्ट फोटो, जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, अन्य कोई विशेष प्रमाणपत्र अगर आवश्यक है तो) संलग्न कर उसी विद्यालय में फॉर्म को जमा कराए, जहां प्रवेश लेना है। 

विद्यालय में रिक्त सीट से अधिक फॉर्म जमा होने पर फॉर्म जमा होने की आखिरी तिथि के बाद (सामन्यतः अगले दिन या सप्ताह के भीतर) विद्यालय द्वारा परीक्षा आयोजित की जाती है। परीक्षा आयोजन के पश्चात्‌ सफल विद्यार्थियों की सूची जारी की जाती है। सूची जारी होने के बाद सफल विद्यार्थी विद्यालय में निश्चित तिथि तक प्रवेश शुल्क जमा करा आवश्यक दस्तावेज और प्रवेश फॉर्म भरकर जमा कराना होगा, जो विद्यार्थी नियत तिथि तक प्रवेश शुल्क जमा कराने या प्रवेश लेने से वंचित रह गए हैं, उन्हें प्रवेश से वंचित कर अगली सूची जारी की जाएगी। 

स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल: राजस्थान में शिक्षा क्रांति - 


स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल खोलने का उदेश्य शिक्षा से वंचित तबके को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान किया जाना था। गरीब और वंचित तबके को निजी विद्यालयों के समक्ष सुविधासम्पन्न विद्यालय स्थापित करने की शुरुआत 2013 में हुई। योजना का आरम्भ 2014-15 से 66 विद्यालयों का सफल संचालन के साथ शुरु हुआ। पहली बार सभी 134 स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल के तहत संचालित विद्यालय सभी लोगों का ध्यान आकर्षित करने में तब सफल हुए जब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परीक्षा, 2018 में निजी स्कूलों को परिणाम में पछाड़ दिया। सभी 134 विद्यालय का परिणाम 87.15% रहा जो औसत 86.6% के मुकाबले से अधिक था। साथ ही 16 विद्यालय का परिणाम शत-प्रतिशत था। हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों को प्रवेश दे हिन्दी माध्यम के शिक्षको द्वारा अध्यापन के बावजूद इस परिणाम ने इनकी सफ़लता की शुरूआती कहानी लिखी। तब तक स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल कक्षा 6 से 10 तक संचालित किए जाते थे। 
विद्यालयों को बेहतर करने के उदेश्य से वर्ष 2018 के बजट में सरकार नें सभी स्कूल में प्राथमिक शिक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालय खोलने की घोषणा के साथ ही 20 स्कूल में 100 छात्राओं की क्षमता वाले छात्रावास की घोषणा की। वर्तमान में सभी विद्यालय नर्सरी से बाहरवी तक की शिक्षा देते हैं। लगभग सभी मे कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय में शिक्षा दी जा रही है, हालांकि कई विद्यालयों में कला और विज्ञान संकाय ही है। वर्षवार संचालित किए गए स्थापित स्कूल की संख्या पर आप एकबार नजर दौड़ा सकते हैं। पहली बार स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल का संचालन प्रदेश में 2014-15 को 66 स्कूल खोलने के साथ शुरु हुआ। 

किस वर्ष कितने नए स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल संचालित किए गये? 


वर्ष  खोले गए मॉडल स्कूल की संख्या 
2014-15 66
2015-16 05
2016-17 61
2017-18 02
कुल  134


विभिन्न स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों के देश के सर्वोच्च अभियांत्रिकी संस्थान आईआईटी के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा में सफलता, मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने के लिए NEET में सफ़लता के समाचार प्रतिवर्ष आते हैं। साथ ही विद्यालयों के विद्यार्थी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय स्तर पर चयनित भी हुए हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न विद्यार्थियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फेलोशिप हासिल करने में भी सफ़लता पाई है। यह सभी कारण इनके सफलता की कहानी को बता रहे हैं। 

स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल की आवश्यकता - 


वर्तमान युग तकनीकी का युग है। इस युग में पूरा विश्व एक गांव बन गया है, वैश्वीकरण से। सच कहे तो सही मायने में वैश्वीकरण को सफल बना  वर्तमान स्वरुप दिया है, तकनीक ने। आज तकनीक जीवन का अंग बन गई है। भले सूचनाओं के आदान प्रदान करना हो या घर बैठे कुछ भी खरीदना है तो तकनीक सीखने की आवश्यकता है। वैश्वीकरण के इस दौर में, तकनीक किसी एक देश की संपदा नहीं रह गई है। तकनीक का विकास और उसका वितरण उतना ही तीव्र है, जितना तीव्र तकनीक स्वयं का कार्य संपादन किया जाना। 

इस तकनीक के दौर में, विश्व की एक भाषा बनती जा रही है, जो है अंग्रेजी। ऐसे एक भाषा के दौर में अंग्रेजी को सीखने की आवश्यकता उतनी अधिक हो गई है, जितनी अपने मोहल्ले की भाषा को सीखना। आज बिना अंग्रेजी भाषा को जाने और समझे  तकनीक का उपयोग किया जाना संभव प्रतीत होने वाला कार्य नहीं है। तकनीक का जीवन को सुगम बनाने के लिए सही इस्तेमाल करने के साथ इस क्षेत्र में रोजगार प्राप्ति के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। बिना अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के आज दुनिया से कदम मिलाना संभव नहीं है। 

राजस्थान में संचालित हो रहे स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल अंग्रेजी भाषा में ज्ञान देने के साथ ही तकनीक के इस्तेमाल किए जाने की सफ़ल शिक्षा देते रहे हैं। आज इन विद्यालयों से पढ़े कई विद्यार्थी विदेशी विश्वविद्यालयों में छात्रवृत्ति से अध्ययन कर रहे हैं। यह सब संभव हुआ है, विद्यालय के शिक्षको के समर्पण से। विद्यालय के उपकरणों के इस्तेमाल और शिक्षा देने की पद्धति से। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल ने राजस्थान में अंग्रेजी माध्यम और भाषा में शिक्षा देने के तरीकों को बदल कर रख दिया। 

गरीब का बच्चा महंगे निजी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में शिक्षा लेने के लिए नहीं जा सकता है, उसे आवश्यकता है सरकारी सहायता की। एक ऐसे विद्यालय की जहां अन्य गतिविधि से अधिक बल शिक्षा पर दिया जाए और सभी सहपाठी समान आर्थिक स्थिति वाले परिवार से हो। ग्रामीण और निजी विद्यालय की पहुंच से दूर रहे लोगों का अंग्रेजी में अपने बच्चों को निजी स्कूल की सुविधा के मुकाबले में शिक्षा देने का सपना साकार किया है, स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल ने। ऐसे में बड़े पैमाने पर उनकी आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकार को भी आवश्यकता है, अतिरिक्त विद्यालय खोले जाने की। जिन ब्लॉक में आज भी विद्यालय नहीं वहाँ विद्यालय खोले जाए और सभी में हॉस्टलों की व्यवस्था भी की जाए। 

आवश्यक प्रश्न-


प्रश्न: स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल का माध्यम क्या है? 

उत्तर: राजस्थान में कुल 134 स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल है जिनमे अग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाता है। 

प्रश्न: राजस्थान स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल कब शुरु किये गये? 

उत्तर: राजस्थान में स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल वर्ष 2013 में शुरु किये गये। 

प्रश्न: राजस्थान के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल की संबंध किस बोर्ड से है? और कौनसा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है? 

उत्तर: राजस्थान में स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल अंग्रेजी माध्यम विद्यालय है, जिनकी संबंधता केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से है और विद्यालयों में राष्ट्रीय शैक्षिक एंव अनुसंधान पारिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। 

प्रश्न: राजस्थान में कुल कितने स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल है? 

उत्तर: राजस्थान में कुल 134 स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल है । जो राज्य के 27 जिलों में है। 

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल क्या है? Swami Vivekanand Model School? 

उत्तर : स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल राजस्थान सरकार द्वारा संचालित राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय है। 

प्रश्न: राजस्थान में सर्वश्रेष्ठ सरकारी स्कूल कौनसे हैं? 

उत्तर : राजस्थान सरकार द्वारा संचालित राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों का नाम स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल राजस्थान के सर्वश्रेष्ठ स्कूल हैं।

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल किस माध्यम में शिक्षा देते हैं क्या है? Swami Vivekanand Model School? 

उत्तर : स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल राजस्थान राज्य में सरकारी स्कूल है जो अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देते हैं। 

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल कितने जिलों में है?

उत्तर : स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल कितने जिलों में है?

उत्तर : स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों  की शुरुआत 2013 में हुई वर्तमान में 27 जिलों में 134 विद्यालय है। 

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