गणेश मूर्ति की स्थापना गणेश मूर्ति रंग, प्रकार और विशेषताएं। Ganesh Murti

मूर्ति का अर्थ किसी ठोस प्रतिमा या रुप से है। एक तरीके से मूर्ति वो आकृति है, जिसके द्वारा किसी विशेष शक्ल या सूरत को उकेरा गया हो। गणेश मूर्ति से अभिप्राय ऐसी प्रतिमा से है, जिसमें किसी ठोस वस्तु पर भगवान गणेश की शक्ल सूरत को उकेरा गया हो। यह मूर्ति पत्थर, मिट्टी अथवा धातु किसी ठोस पदार्थ की हो सकती है। 

गणेश मूर्ति। Ganesh Murti

गणेश चतुर्थी के आते ही गॉव शहर कि गालियों में आपने अक्सर भगवान गणेश की छोटी-बड़ रंग-बिरंगी, आकर्षक मन को मोह लेने वाली मूर्तियां देखी होगी। इन मूर्तियों को देखकर आपके मन में भी ख्याल आता होगा कि यह मूर्तियाँ कैसे बनाई जाती है, कहाँ मिलती है? कितने की मिलती है और कितने दिन तक लगी रहती हैं। इसके अतिरिक्त छोटी और आकर्षक मूर्तियां घरों और व्यावसायिक संस्थानों पर भी लगाई जाती है। इनके कुछ स्वरुप वक्रतुण्ड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट, विघ्नहर्ता और धूम्रवर्ण आदि। 

भगवान गणेश - शुभ कार्य सिद्धि के लिए पूजन 

कोई भी शुभ कार्य कि शुरुआत करने से पूर्व भगवान गणेश को आमंत्रित करने की हमारी पुरानी परंपरा है। शादी विवाह जैसे मौके पर सबसे पहले गणेश जी को ही आमंत्रित किया जाता है। व्यावसायिक संस्थानों के खाताबही की शुरुआत श्री गणेश से होती है। ऐसे में गणेश जी कि मूर्तियों का प्रचलन भी बढ़ा है, साथ ही गणेश उत्सव की धूम के चलते आकर्षक को विशेष स्थान मिलने लगा है।

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, खुशहाली, समृद्धि, बुद्धी और अच्छे भाग्य का देवता माना जाता है। सभी धार्मिक उत्सव की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा करके की जाती हैं। भगवान गणेश जी कि दो पत्नियां है - रिद्धि और सिद्धि। किसी शुभ कार्य कि शुरुआत में इन्हें भी कार्य सिद्धि और समृद्धि के लिए आमंत्रित किया जाता है। सभी कार्यो के लिए अलग-अलग रंग और आकार की मूर्ति कि आवश्यकता होती है। 

गणेश मूर्ति - विघ्नहर्ता 

जब भी हम किसी शुभ कार्य की शुरुआत करते हैं तब, कार्य में किसी प्रकार का विघ्न अथवा बाधा उत्पन्न ना हो इसलिये भगवान गणेश की पूजा विघ्नहर्ता देवता के रुप में की जाती है। इस पूजा की शुरुआत से भगवान की आराधना और स्तुति कर उन्हें उत्पन्न होने वाले विघ्न के हरण के लिए प्रार्थना करते हैं। मान्यता के अनुसार दैत्यराज मम के द्वारा उत्पन्न किए गए विघ्न को समाप्त करने के लिए देवताओ ने गणेश जी का विघ्नहर्ता के के रुप में सहयोग प्राप्त किया था, इस कारण से उन्हें हम विघ्नहर्ता के रुप में पूजते है। 

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। 

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा।। 

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रुप में पूजने के लिए उनकी विघ्नहर्ता मूर्ति को लाना चाहिए। विघ्नहर्ता गणेश की मूर्ति में गणेश जी कमल पुष्प पर विराजमान होते हैं तथा उनके हाथ में भी कमल का पुष्प होता है। ऐसी प्रतिमा आप घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्थापित की जाती है। अगर आप विघ्नहर्ता गणेश की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं तो बुधवार को भगवान गणेश की विधिवत पूजा अर्चना कर सफेद मूर्ति की स्थापना की जानी चाहिए। अगर आप विघ्नहर्ता गणेश की मूर्ति घर के मुख्य दरवाजे पर लगाना चाहते हैं तो बुधवार के दिन सिंदूरी रंग की मूर्ति मुख्य दरवाजे पर स्थापित करे। 

गणेश मूर्ति - खुशहाली के लिए 

विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा खुशहाली और सुख-समृद्धि के लिए भी की जाती है। भगवान को मंगल कार्यो पर आमंत्रित कर कार्य पूर्ति के साथ ही शुभ और मंगलकारी होने के लिए प्रार्थना की जाती है। कार्य के आरंभ में तनाव से मुक्त हो खुशहाली लाने के लिए स्तुति की जाती है। खुशहाल, धन-संपदा के लिए पूजा जाने के कारण ही व्यापारिक कार्यो की शुरुआत गणेश आराधना और स्तुति से होती है। कार्य कि शुरुआत या श्री गणेश का अभिप्राय बिना किसी विघ्न के कार्य का पूरा हो जीवन को खुशहाल करने से है। 

घर-परिवार में खुशहाली, समृद्धि, धन-सम्पत्ति और सुख-शांति के लिए विशेष प्रकार कि वक्रतुण्ड गणेश मूर्ति स्थापित की जानी चाहिए। वक्रतुण्ड मूर्ति की स्थापना करते समय ध्यान दे कि बांये हाथ की तरफ सूंड की मूर्ति कि स्थापना सुख-समृद्धि के लिए और सीधी सूंड वाली मूर्ति खुशहाली के लिए। दांयी और सूंड कि मूर्ति के गणेश जिद्दी होते हैं,  ऐसे गणेश जी की पूजा आसान नहीं होती है, इसलिए बांयी ओर या सीधी सूंड की मूर्ति स्थापित करे। आम, पीपल और नीम की मूर्ति सकारात्मक ऊर्जा कि प्रतीक होती है इसलिए इसे घर में स्थापित कर नित्य पूजा करने से धन संपति की प्राप्ति होती है। लेटे हुए गणेश जी की मूर्ति लगाने से घर में सुख और आनंद आता है। 

हल्दी के गणेश जी बनाकर पूजा करने से भाग्योदय होता है और सुख-शांति आती है। ज्ञान, बुद्धि और धन की प्राप्ति होती है भाग्योदय होने से। सफलता प्राप्त करने के लिए लाल रंग की मूर्ति कि स्थापना करनी चाहिए। घरों में शांति और समृद्धि के लिए बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति लगाई जाती है तो कार्यस्थलों और व्यावसायिक संस्थान पर खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति लगाई जाती है। 

गणेश मूर्ति - कलात्मक और धार्मिक महत्व

आपने अक्सर देखा होगा कि फ़िल्मकार भी नई फिल्म कि शूटिंग शुरु करने से पूर्व गणेश जी कि पूजा करते हैं। गणेश को विघ्नहर्ता और कार्य सिद्धि के अतिरिक्त कला के देवता के रुप में भी पूजा जाता है। 

कला को सीखने के इच्छुक गणेश जी की मूर्ति नृत्य मुद्रा में स्थापित कर पूजा करते हैं। 

गणेश मूर्ति के रंग और महत्व - 

पीली मूर्ति - गणेश जी की पीले रंग की मूर्ति को 'हरिद्रा गणेश' कहा जाता है। ऐसे रंग की 6 हाथ की मूर्ति की मुख्य पूजा स्थल पर स्थापना करने से मंगलकारी कार्य संपन्न होते हैं तथा समान्य पीले रंग की मूर्ति की स्थापना से पीला ऋणमोचन के कार्य संपन्न होते हैं, यानी सम्पदा आती है। इससे शांति और इंद्रिय नियंत्रण के शुभ फल प्राप्त होते है। 

लाल मूर्ति - इन्हें आप 'रक्तवर्ण गणेश' कहते हैं। ऐसी मूर्ति चार हाथ वाली सामन्यतः संकट हरण के लिए स्थापित की जाती है। इस प्रकार के गणेश जी की दुर्वा से पूजा की जाती है। 

सफेद मूर्ति - इस प्रकार की मूर्ति 'द्विज गणेश' कहलाती हैं। ऐसी चार हाथ की मूर्ति की पूजा विद्या, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए की जाती है। 

नीली मूर्ति -  ऐसे नील वर्ण के गणेश जी की मूर्ति को 'उच्छिष्ट गणेश' कहते हैं। इस प्रकार के गणेश जी की पूजा उच्च पद प्राप्ति, सफ़लता और तंत्र मंत्र के बचाव के लिए किया जाता है।

इनके अतिरिक्त आप अपनी राशि के अनुसार नारंगी, गुलाबी और अन्य रंगों की मूर्ति की स्थापना अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। लेकिन मूर्ति की स्थापना से पूर्व उसके लाभ और दोष अवश्य जान लेने चाहिए और स्थापना संबंधी नियम भी जान लेने चाहिए। यह जानकरी प्राप्त करने के लिए आगे पढ़े इस लेख को। 

अन्य प्रकार की गणेश जी के स्वरुप कि मूर्तियां और महत्व - 

गणेश जी के कई स्वरुप है और प्रत्येक स्वरुप कि अलग-अलग मूर्तियाँ है, इनमें से कई स्वरुप पहले ही स्पष्ट किए जा चुके हैं, कुछ और भी स्वरुप जिनका वर्णन ऊपर नहीं हुआ है, वो निम्नलिखित है - 

  • श्वेतार्क गणेश - आक के फूल महादेव जी साथ गणेश जी को भी चढ़ाये जाते हैं। इसी सफेद आक की जड़ से सफेद रंग की मूर्ति बनाकर घर के मुख्य द्वार पर लगाई जाती है। ऐसी मूर्ति विघ्नहर्ता और शांति के लिए लगाई जाती है। इस प्रकार कि मूर्ति की नित्य पूजा करने से सफ़लता की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि आती है। 
गणेश मूर्ति। Ganesh Murti

  • वक्रतुंड - वक्र यानी मुड़ा हुआ, तुंड यानी सूंड। वक्रतुण्ड यानी मुड़ी हुई सूंड। भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमा जिसमें उनकी सूंड मुड़ी हुई हो उसे वक्रतुण्ड गणेश कहा जाता है। बांयी तरफ मुड़ी हुई सूंड सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्ति के लिए स्थापित की जाती है, वही सीधी सूंड की मूर्ति की स्थापना खुशहाली के लिए की जाती है। दांयी तरफ मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी जिद्दी होते हैं, इस तरह के गणेश जी की पूजा आसान नहीं होती है। इस तरह की मूर्ति की पूजा करने से भय की समाप्ति होती है। 
  • महागणपति - गणपति के इस स्वरुप में गणेशजी के सभी रुप शामिल होते हैं। इस मूर्ति के दस हाथ होते हैं और त्रिनेत्र होते हैं। महागणपति का रुप और रंग रक्तवर्ण होता है। इन्हें ऋण मोचक गणपति कहा जाता है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी प्रकार के ऋण से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति, धन-सम्पत्ति और समृद्धी आती हैं। 

गणेश मूर्ति बनाने कि सामग्री और लाभ - 

अक्सर आपने देखा होगा कि गणेश जी कि मुर्तियां मिट्टी, धातु और पत्थर की बनी हुई होती है। इसके अतिरिक्त भी विशेष सामग्री से मूर्तियां बनाकर विशेष कार्य सिद्धि के लिए पूजा की जाती है। कुछ विशेष निम्नलिखित है - 

  • हल्दी कि मूर्ति - इस प्रकार की मूर्ति हल्दी से बनाई जाती है, इस प्रकार की मूर्ति कि पूजा करने से भाग्योदय होता है। 
  • गोबर कि मूर्ति - गाय के गोबर से बनी हुई मूर्ति में धन कि देवी देवी माँ लक्ष्मी का वास होता है। इस प्रकार कि मूर्ति की पूजा करने से धन-धान्य आता है। 
  • क्रिस्टल कि मूर्ति - इस प्रकार की मूर्ति की पूजा करने से सभी प्रकार के दोष भगवान गणेश खुश होकर काट देते हैं 

कहाँ स्थापित करे गणेश मूर्ति 

घर मे गणेश जी कि मूर्ति को घर के उत्तर पूर्वी कोने में लगाना चाहिए इससे आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अगर किसी कारणवश घर के पूर्व या पश्चिम में लगाए तो मूर्ति के पैर जमीन को छूने चाहिए। ध्यान रखे घर में मूर्ति स्थापित कर रहे हैं तो गणेश जी के साथ चूहा और मोदक भी अवश्य लगाने चाहिए। 

कहाँ स्थापित ना करे गणेश मूर्ति - 

घर के दक्षिण कोने मे भूल से भी गणेश जी कि मूर्ति को स्थापित ना करे। घर मे या दुकान मे सीढ़ियों के नीचे या शौचालय के पास स्थापित ना करे। अपने सोने वाली जगह  पर भी मूर्ति को ना रखे। घर के बाहर पीपल के वृक्ष के निचे गणेश जी कि मूर्ति ना लगाए। ध्यान रखे घर में दो मूर्ति ना लगाए, ऐसा करने से गणेश जी की पत्नी सिद्धि नाराज हो जाती है, जिससे आपकी मनोकामना पूर्ण नहीं हो सकती हैं।

गणेश उत्सव और गणेश मूर्ति -


भाद्रपद महीने में गणेश उत्सव की शुरुआत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) के दिन से शुरु हो जाता है, यह उत्सव अगले दस दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक चलता है। गली मोहल्ले में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है। जब से डीजे का चलन आया है तब से दिनभर डीजे पर भजन कीर्तन होता रहता है। सवेरे और संध्या के समय गणेश जी की आरती होती है। गली-मोहल्ले के बच्चे, बुढ़े, जवान और महिलाए सभी बढ़-चढ़कर इस आरती और उत्सव मे भाग लेते हैं। गॉव गली में अलग ही तरह का माहौल बन जाता है, हर तरफ माहौल भक्तिमय हो जाता है। सभी बढ़-चढ़कर इसमे भाग लेते और होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा से कार्यक्रम को बेहतर बनाने के लिये अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देते हैं।

गणेश उत्सव की शुरुआत गणेश मूर्ति से होती है इसलिए सबसे पहले एक मूर्ति को खरीदा जाता है। इस उत्सव को ध्यान में रखते हुए वर्षभर कार्य करने वाले कलाकार उत्सव की शुरुआत के कुछ दिन पहले सड़क किनारे मूर्ति बेचने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन करते हैं जहां लोग अपनी पसंद की मूर्ति का चयन कर अपनी गली में ला स्थापित करते हैं। ये मूर्तियां विभिन्न रंग, डिजायन और साइज में उपलब्ध होती है। भक्त अपनी पसंद की मूर्ति का चयन कर खरीद लाता है और स्थापित करते हैं।

प्रश्न -


प्रश्न: गणेश मूर्ति की स्थापना कब की जाती है?

उत्तर: गणेश मूर्ति की स्थापना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, जिसे गणेश चतुर्थी कहा जाता है, उस दिन स्थापित की जाती है।

प्रश्न: गणेश उत्सव कितने दिन का होता है?

उत्तर: गणेश उत्सव दस दिन का होता है, इसकी शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और समापन अनंत चतुर्दशी को।

प्रश्न: गणेश मूर्ति का विसर्जन कब किया जाता है?

उत्तर: गणेश मूर्ति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी) को किया जाता है।

प्रश्न: कहाँ का गणेश उत्सव प्रसिद्ध हैं?

उत्तर: मुंबई का गणेश उत्सव बहुत प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न: श्वेतार्क गणेश मूर्ति क्या होती है?

उत्तर: सफेद आक के जड़ की मूर्ति को श्वेतार्क गणेश कहा जाता है। 

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