कॉमर्स में क्या सब्जेक्ट ले - Commerce ke Subject

कॉमर्स में क्या सब्जेक्ट ले - Commerce ke Subject

जो बच्चे दसवीं पास करने बाद कॉमर्स (वाणिज्य) लेते हैं वो अक्सर पूछते हैं कि कॉमर्स में क्या सब्जेक्ट (विषय होते हैं? किस विषय को लेना चाहिए ताकि भविष्य में नौकरी प्राप्त करने में आसानी हो या खुद के व्यवसाय को शुरु कर आगे बढ़ाया जा सके।
कुछ लोग तो यह भी पूछते हैं कि कॉमर्स सब्जेक्ट क्या है? वो जान ले कि कॉमर्स यानी वाणिज्य। वाणिज्य दो क्रियाओं का मेल है व्यापार + व्यापार की सहायक क्रियाएं। यह व्यापार अथवा उद्योग शुरु करने से लेकर वस्तु के विक्रय के बाद तक होने वाली क्रियाओं को सम्मिलित करने के कारण व्यावसायिक, लेखांकन और वित्तीय सेवाओं सम्बन्धित विषय सम्मिलित करता है।

कॉमर्स में पढ़ाये जाने वाले सब्जेक्ट -


कॉमर्स लेने वाले विद्यार्थियों को जो विषय कक्षा 11 और 12 में पढ़ने आवश्यक है और विषय वो अन्य विषय के तौर पर भविष्य में रोजगार की संभावना को देखते हुए ले सकते हैं वो सभी नीचे सारणी में दिए हुए हैं। हालांकि यहाँ ध्यान दीजिए अगर आप सीबीआई से पढ़ रहे हैं तो अंग्रेजी अनिवार्य को विज्ञान, वाणिज्य और कला सभी मे पढ़ाया जाता है, वही स्टेट बोर्ड उदाहरण राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में अंग्रेजी के साथ हिंदी भी अनिवार्य रूप से पढ़नी होती है, अन्य विषय निम्न है - 

अनिवार्य
(सभी संकाय) 
कॉमर्स के लिए
(अनिवार्य विषय) 
वैकल्पिक विषय 
सीबीआई 
- अंग्रेजी 

RBSE 
- अंग्रेजी 
- हिंदी 
- लेखाशास्त्र 
- व्यावसायिक अध्ययन/प्रबंधन 
- टंकण (हिन्दी और अंग्रेजी)
-  अर्थशास्त्र 
- अंकगणित 
- सूचना विज्ञान अभ्यास 
- कंप्यूटर 
- शारीरिक शिक्षा 

यहां ध्यान दीजिए आपको कुल पांच विषय (कक्षा 11 और 12 मे) लेने है। अगर आप केंद्रीय बोर्ड से पढ़ाई कर रहे हैं तो एक अंग्रेजी अनिवार्य और दो वाणिज्य के अनिवार्य विषय (लेखाशास्त्र और व्यावसायिक प्रबंधन) तीन विषय अनिवार्य लेने होंगे शेष दो वैकल्पिक विषय में से कोई भी ले सकते हैं। वैसे ही अगर आप राजस्थान बोर्ड से पढ़ रहे हैं तो दो भाषा (हिन्दी और अंग्रेजी) अनिवार्य रूप से लेनी होगी इसके साथ ही दो वाणिज्य के विषय (लेखाशास्त्र और व्यावसायिक अध्ययन) अनिवार्य लेने होंगे शेष एक कोई भी विषय आप वैकल्पिक में से ले सकते हैं। 

कॉमर्स में क्या सब्जेक्ट पढ़ाये जाते हैं? 


अनिवार्य - 


लेखांकन (Accounting) -  

किसी व्यावसायिक संगठन अथवा प्रतिष्ठान द्वारा प्रतिदिन जो व्यापारिक व्यवहार (खरीद, विक्रय और अन्य नकद लेन-देन) किए जाते हैं उन सभी को लेखा बही में दर्ज कर मासिक, अर्द्धवार्षिक और वार्षिक (जब भी आवश्यक हो) रूप से तुलन रुप में प्रतिवेदन प्रस्तुत करना ताकि लाभ-हानि, उधारी, अंतिम स्टॉक और नकद का पता चल सके। इस विषय में व्यापार के हिसाब-किताब और लेन-देन संबंधित सभी गतिविधियों को दर्ज करने और समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने संबंधित सभी जानकारी और शिक्षा दी जाती है। इस विषय में एक कंपनी से संबंधित लेखांकन भी सिखाया जाता है तथा साथ ही कंपनी द्वारा अंशदाताओं के अतिरिक्त संबंधित पक्षकारों को प्रस्तुत किए जाने वाले सभी रिपोर्ट और बनाने के तरीकों को सिखाया जाता है।

व्यावसायिक अध्ययन/प्रबंधन (Business Studies/Management) - 

लेखाशास्त्र की भांति व्यावसायिक अध्ययन अथवा व्यावसायिक प्रबंधन अनिवार्य रूप से लेना आवश्यक है। इस विषय में व्यवसाय के संचालन से सम्बन्धित योजना, संगठन, मानव नियुक्ति, निर्देशन और नियंत्रण संबधित सभी आवश्यक विषयवस्तु को पाठ्यक्रम में शामिल कर शिक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही व्यावसायिक कौशल, संचार और प्रबंधन सम्बन्धित कौशल का विकास करता है, जिससे किसी भी तरह के व्यवसाय का सफ़ल संचालन संभव हो सके। इसके अध्ययन से विद्यार्थियों में व्यावसायिक कौशल के साथ ही संचार और व्यावसायिक संबंधो को स्थायित्व प्रदान कर बाजार प्रतियोगिता में व्यवसाय को बनाये रखने की शिक्षा को भी सम्मिलित किया गया है। 

वैकल्पिक - 


अर्थशास्त्र (Economics) - 

आज के समय की मांग है, अर्थशास्त्र की शिक्षा। संसाधनो का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए अधिकतम लाभ या संसाधनो का इष्टतम उपयोग किया जाना ही अर्थशास्त्र का उपयोग है। इस विषय के माध्यम से संसाधनो की कमी को ध्यान में रखते हुए मानव कल्याण और पर्यावरण की सुरक्षा का हित साधते हुए संसाधनो का उत्पादन और वितरण के लिए बेहतर चयन की शिक्षा। इसके साथ ही राष्ट्रीय आय, प्रतिव्यक्ति आय, राजकोषीय नीति और व्यक्तिगत निर्णय को प्राथमिकता देना। व्यावसाय में संसाधनो के उपयोग के निर्णय के साथ ही कीमत का निर्धारण किया जाना और लागत में कमी लाने के निर्णय व्यवसाय की नीति निर्धारण से निर्धारित किया जाना और देश में बजट के निर्णयों की शिक्षा। हालांकि कई लोग इसे धन का विज्ञान भी कहते हैं कि किस प्रकार से धन का उपयोग किया जाए, इससे संबंधित निर्णय भी अर्थशास्त्र के माध्यम से लिए जाते हैं। 

टंकण (Type) - 

टंकण एक लिपि है। यह टाइपराइटर द्वारा दिए गए लेख, प्रार्थना पत्र और सारणी को लिखे जाने की विधि है। टंकण कुंजीपटल के माध्यम से लिखने की लिपि अथवा कला है। राजस्थान बोर्ड में अधिकांश विद्यार्थी पांचवे विषय के तौर पर टंकण लिपि को लेते हैं। लिपि को सीखकर पहले सरकारी और निजी संस्थानों में बाबू (क्लर्क) और बैंक में कैशियर और लिपिक की नौकरी पा सकते थे। आजकल भी कई संस्थान कंप्यूटर के माध्यम से प्रति मिनट शुद्ध शब्दों की संख्या देखकर नोकरी देते हैं। कुछ लोग इस लिपि का अध्ययन करने के बाद साइबर कैफे अथवा जहां लोग सरकारी दफ्तर में देने के लिए अर्जी टाइप करवाते वहाँ अपनी दुकान खोल देते। आजकल टाइप जानने वाले लोगों को डाटा एंट्री सबंधित कार्य और रोजगार आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। 

सूचना विज्ञान अभ्यास ( Informatics Practices) 

य़ह कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से सम्बन्धित ज्ञान की वह शाखा है जिसमें सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग और कोडिंग संबंधित अवधारणाओं को सम्मिलित किया जाता है। बैंक और आजकल बढ़ते हुए इलेक्ट्रॉनिक युग में नौकरी पाने के लिए इस विषय का चयन किया जाता है। आधुनिक युग डिजिटल युग है, इस डिजिटल क्षेत्र में नोकरी पाने के लिए इस विषय का चुनाव किया जाता है। खासतौर से केंद्रीय बोर्ड में पढ़ने वाले विद्यार्थी लेखाकार कार्यो के साथ तकनीकी शिक्षा को सीखने के लिए इस विषय का चुनाव अधिक करते हैं। 

कंप्यूटर विज्ञान (Computer Science)

कंप्यूटर विज्ञान हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों प्रकार की शिक्षा को सम्मिलित करता है। कम्प्यूटर विज्ञान ने आजकल टंकण लिपि को पछाड़ दिया है। विद्यार्थी कंप्यूटर विषय में कंप्यूटर सम्बन्धित शिक्षा प्राप्त कर डिजिटल युग में नोकरी आसानी से पा सकते हैं। साथ ही बदलते परिवेश में डिजिटल, तकनीक और कंप्यूटर की बढ़ती आवश्यकता ने कंप्यूटर तकनीक के जानकारों की मांग तेजी से बढ़ा दी है, ऐसे में 12 वीं के बाद कंप्यूटर से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों के लिए 12 वीं में कंप्यूटर लिया जाना चाहिए ताकि अच्छी नींव मिल सके। 

अंकगणित (Mathematics) - 

अर्थशास्त्र में स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को 12 वीं और आगे की कक्षाओं में गणित और सांख्यिकी पढ़नी होती है, ऐसे में आप 12 तक भी गणित पढ़ने के लिए इसे वैकल्पिक विषय के तौर पर चुन सकते हैं। गणित का उपयोग व्यावसायिक संस्थान उत्पादन और विपणन के पूर्वानुमान लगाने की विभिन्न विधियों में करते हैं। ऐसे मे आप गणित का अध्ययन कर व्यावसायिक संस्थानों में विपणन विशलेषण और पूर्वानुमान की नौकरी पा सकते हैं। वैसे आजकल बैंकिंग क्षेत्र में भी जाने वालों को प्रतियोगी परीक्षाओं से गुजरना होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में गणित के काफी प्रश्न पूछे जाते हैं, ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में जॉब पाने की उम्मीद रखने वालों के लिए भी गणित उपयोगी है। 

शारीरिक शिक्षा (Physical Education) - 

बदलते समय में लोग तनाव का शिकार होते जा रहे हैं, तनाव से मुक्ति के लिए खेल और योग की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जिसके कारण खेल और योग के ट्रेनर की भी आवश्यकता बढ़ी हैं। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालय खेल और योग संबंधित कोर्स करवा रहे हैं। उन्हीं कोर्स को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्कूल के बोर्ड द्वारा शारीरिक शिक्षा को एक वैकल्पिक विषय के तौर पर लिए जाने का प्रावधान किया गया। इस विषय में खेल और योग से कैसे व्यक्ति को तनाव मुक्त रखकर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सके ताकि वो व्यावसाय को अपना अधिकतम योगदान दे सके। 

कॉमर्स लेने का फायदा क्या है? 


जब बच्चे दसवीं पास कर 11 वीं कक्षा में प्रवेश लेते हैं, उस समय कॉमर्स लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के दिमाग में एक प्रश्न अवश्य आता है आखिर कॉमर्स ही क्यों ले? कॉमर्स लेने का क्या फायदा है? आइए जानते हैं कुछ इस तरीके के पेशे जो सिर्फ कॉमर्स लेने वाले विद्यार्थियों के लिए ही है - 

चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountants - CA) - यह कंपनी द्वारा देय टैक्स की गणना करने का कार्य करते हैं, साथ ही कंपनी के लेखाकार के रुप में सेवायें देते हैं, यह टैक्स संबंधित कार्य करने के कारण कंपनी के साथ ही सरकार के भी अधिकारी के रुप में कार्य करते हैं क्योंकि लेखा और टैक्स भुगतान के लिए इनकी अनुमती अथवा मोहर की आवश्यकता होती है। 
कंपनी सचिव (Company Secretary - CS) - - कंपनी सचिव कंपनी का अधिकारी होता है जो कंपनी में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक और उनके रिकॉर्ड की देखरेख करने के साथ ही कंपनी और अन्य सम्बन्धित पक्षकारों के मध्य कड़ी के रुप में कार्य करता है। 
चार्टर्ड वित्तीय विश्लेषक (Chartered Financial Analyst - CFA) - वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनियां वित्त का निवेश कहाँ करे, कहाँ लाभ की संभावना है इस तरह वित्त सम्बन्धित सेवा देने वाला अधिकारी। 
प्रबंधन (Management) - हालांकि आजकल सभी संकाय के विद्यार्थी प्रबंधन संबंधित कोर्सेज (BBA, MBA) कर रहे हैं, किन्तु वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए यह अधिक उपयोगी होता है क्योंकि वितरण और विपणन संबंधित विषय वाणिज्य का हिस्सा होता है। 
वित्तीय सेवा - बैंकिंग, बीमा और अन्य वित्तीय संस्थानों में वाणिज्य के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है। 
अन्य - लेखाकार, कैशियर और शिक्षा क्षेत्रो में भी वाणिज्य के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है। 

अन्य प्रश्न 


प्रश्न : कॉमर्स में क्या सब्जेक्ट पढ़ाये जाते हैं? 

उत्तर: अनिवार्य हिन्दी और अंग्रेज़ी को छोड़कर लेखाशास्त्र और व्यावसायिक अध्ययन अनिवार्य पढ़ना होता है, इसके बाद आप टंकण लिपि, अर्थशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, अंकगणित और सूचना विज्ञान अभ्यास में से कोई किसी भी विषय का चयन कर सकते हैं। 

प्रश्न : कॉमर्स लेने वाले विद्यार्थियों को कौनसे सब्जेक्ट लेने अनिवार्य हैं? 

उत्तर: कॉमर्स के विद्यार्थियों को अनिवार्य भाषा के अतिरिक्त लेखाशास्त्र और व्यावसायिक अध्ययन अनिवार्य रूप से लेने होते हैं।

प्रश्न : कॉमर्स में क्या गणित होती हैं? 

उत्तर: अनिवार्य रूप से नहीं होती है, लेकिन आप चाहें तो वैकल्पिक विषय के तौर पर अंकगणित ले सकते हैं। 

प्रश्न : क्या कॉमर्स के विद्यार्थी सरकारी नोकरी में जा जा सकते हैं? 

उत्तर: जो सरकारी नोकरी स्नातक के लिए जो जैसे आईएएस और आईपीएस ऐसी नोकरी में जा सकते हैं। 

प्रश्न : कॉमर्स में टंकण लिपि क्यों होती हैं? 

उत्तर: अनिवार्य नहीं होती है वैकल्पिक होती है। लेखाकार और कैशियर को टाइप का ज्ञान होना आवश्यक होता है, इसी कारण इसे एक विषय के तौर पर रखा गया है। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ