पीएचडी के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) अनिवार्य। PhD Entrance

पीएचडी करना और नाम के आगे डॉक्टर लगाना हर किसी का सपना होता है। दिखावे की दुनिया में हर कोई अपने आप को अपने मित्रों, रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों में अपने आप को उनसे बेहतर दिखाने की कोशिश करता है। कोई वस्त्रों से, कोई आभूषणों से तो कोई अपनी धन संपदा से खरीदे महंगे उत्पाद गाड़ी और बंगले से। इनके बीच आजकल पढ़े लिखे लोग भी अपने आप को अपने मित्रों से बेहतर दिखाने के लिये नामी संस्थानों से और ऊंची डिग्री से खुद को अलग ढंग से परिचित कराते हैं।

अब पीएचडी करने के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) अनिवार्य। PhD Entrance


यूँ देखा जाए तो शिक्षा कोई दिखावे की वस्तु नहीं किंतु आदमी अपने-आप को अलग दिखाने के लिए प्राप्त करता ही है। खासतौर से आज के युग को देखा जाए तो वर्तमान समय ज्ञान का समय है, हर कोई ज्ञान को प्राप्त करने के लिए लालायित दिखता है क्योंकि ज्ञानी व्यक्ति की पूछ है। ज्ञान को प्राप्त करने के लिए अध्ययन की आवश्यकता होती है और अध्ययन से व्यक्ति अपना पेशा चुनता है तो डिग्री की आवश्यकता ऐसे में हम कह सकते हैं कि ज्ञान और डिग्री आपस में जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि आज के समय में व्यक्ति को डिग्री की आवश्यकता है।

क्या होती है पीएचडी?


पीएचडी कई देशों के विश्वविद्यालय द्वारा ज्ञान की शाखा की उच्चतम डिग्री है। पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलाॅसफी) एक डॉक्टरेट की उपाधि है, जो विश्वविद्यालय द्वारा उन अध्यनरत शोधार्थी छात्रों को दी जाती है जो एक विशिष्ट विषय के ज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महत्वपूर्ण शोध कार्य को पूरा करते हैं। पीएचडी को हिन्दी में "विद्या वाचस्पति" कहा जाता है। पीएचडी की डिग्री विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री प्राप्त कर लेने के बाद किए गए शोध कार्य के पूरा होने पर दी जाती है।

वर्तमान समय में पीएचडी की आवश्यकता विश्वविद्यालय और डिग्री महाविद्यालय में अध्यापन और शोध कार्यों के लिए आवश्यक हैं। पीएचडी की उपाधि हासिल कर लेने के पश्चात्‌ व्यक्ति अपने नाम के पूर्व 'डॉ' उपाधि का प्रयोग करता है जो उसकी विशेष शिक्षा और योग्यता को दर्शाता है। पीएचडी व्यक्ति द्वारा किसी विशेष विषय में शोध कर ज्ञान में अपना योगदान देने के लिए दी जाती है। पीएचडी का अर्थ है जिस विषय पर शोध किया उसकी पूरी जानकारी हासिल कर अपनी तरफ संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण सिफारिश देना। शोधार्थी द्वारा ऐसा शोध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के नेतृत्व में किया जाता है। 

पीएचडी में प्रवेश के लिए योग्यता - 


पीएचडी करने के लिए छात्रों में पिछले कुछ वर्षों में उत्सुकता बढ़ी है। पिछले कई वर्षो से पीएचडी में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है। भारत में शोध और अनुसंधान के अवसरों में वृद्धि को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुसंधान आयोग, वैज्ञानिक और उद्योगिक अनुसंधान पारिषद (सीएसआईआर) और कई अन्य संस्थानों द्वारा शोध उदेश्य की पूर्ति के लिए छात्रवृत्तियां दी जा रही है। इसके अतिरिक्त दिनोंदिन खुलते कॉलेज और विश्वविद्यालय के साथ विभिन्न संस्थानों में शोध कार्यो के लिए पीएचडी किए हुए लोगों की मांग बढ़ी है। इन्हीं उद्येश्यों को ध्यान में रखते हुए पीएचडी करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। ऐसे में कई लोग पीएचडी के लिए आवश्यक योग्यता जानने को बेताब रहते हैं तो आइये बता देते हैं पीएचडी के लिए अनिवार्य न्यूनतम अहर्ता - 

  • किसी भी मान्यता प्राप्त भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय से दो साल की मास्टर डिग्री (इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के लिए 60%) में 55% अंक या समकक्ष ग्रेड प्राप्त होना।
  • न्यूनतम 55% अंकों या समकक्ष ग्रेड के साथ 'द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' (आईसीएआई) से चार्टर्ड  अकाउंटेंसी (सीए) /आईसीडब्लूएआई की लागत और कंपनी सचिव में 55% अंक।
  • चार वर्षीय स्नातक कोर्स के बाद एक वर्षीय मास्टर्स डिग्री में 7.5 सीजीपीए।
  • जिस विषय में पीएचडी करनी है उसी विषय में मास्टर्स डिग्री होना। 
  • राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) का परीक्षा सफल किए जाने का प्रमाणपत्र होना। 
पहले पीएचडी करने के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के प्रमाणपत्र की अनिवार्यता नहीं थी लेकिन अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पीएचडी के लिए NET को अनिवार्य कर दिया है, ऐसे में आने वाले समय में बिना NET परीक्षा में सम्मिलित हुए पीएचडी नहीं की जा सकेगी। 

पीएचडी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) अनिवार्य - 


हाल ही में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा (पीएचडी के लिए न्यूनतम नियम और प्रक्रिया, 2022) पीएचडी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) अनिवार्य कर दिया है। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के प्रमाणपत्र की तीन केटेगरी (श्रेणी) कर दी गई है जो निम्न लिखित है - 

अब पीएचडी करने के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) अनिवार्य। PhD Entrance


प्रथम - इस श्रेणी का का प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले परीक्षार्थी जूनियर रिसर्च फेलो (JRF), सहायक आचार्य और पीएचडी के मे प्रवेश पाने के लिए योग्य होंगे। 
द्वितीय - इस श्रेणी का प्रमाणपत्र पाने वाले परीक्षार्थी सहायक आचार्य के साथ पीएचडी में प्रवेश के लिए योग्य होंगे।
तृतीय - इस श्रेणी का प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले परीक्षार्थी केवल पीएचडी में प्रवेश पाने के लिए योग्य होंगे। 

अब नए नियमो के अंतर्गत पीएचडी मे प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के प्रमाणपत्र का होना अनिवार्य है। बिना राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा स्कोरकार्ड के पीएचडी में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। पीएचडी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के अंकों का 70% अंकभार और साक्षात्कार का 30% अंकभार ले प्रवेश दिया जाएगा। 

पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए प्रक्रिया - 


विभिन्न मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों द्वारा पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाते हैं। आगे भी प्रक्रिया वही बनी रहेगी। बस नेट का प्रमाणपत्र मय स्कोरकार्ड जमा करना होगा ऐसे में निम्न स्टेप होंगे - 
  • स्टेप - 1 : विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की विज्ञप्ति जारी कर आवेदन आमंत्रित किया जाना। 
  • स्टेप - 2 : पीएचडी में प्रवेश के इच्छुक छात्रों द्वारा ऑनलाइन फॉर्म भरना। सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन स्कैन कर सबमिट करना। 
  • स्टेप - 3 : विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित की गई पीएचडी आवेदन की फीस को ऑनलाइन जमा कराना, और आवेदन में फीस जमा कराने के व्यवहार के नंबर देना। 
  • स्टेप - 4 : ऑनलाइन भरे गए फॉर्म के साथ जमा मांगे गए सभी दस्तावेज (10 वीं, 12 वी, स्नातक, परास्नातक की अंकतालिका, NET का स्कोरकार्ड, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, फीस का चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेज) विश्वविद्यालय के निर्धारित कार्यालय या सम्बन्धित विभाग कार्यालय में जमा किया जाना। 
  • स्टेप - 5 : विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त फॉर्म की छँटनी कर मेरिट के अनुसार छात्रों को साक्षात्कार के लिए कॉल। 
  • स्टेप - 6 : विद्यार्थी द्वारा साक्षात्कार के लिए उपस्थित होना (साक्षात्कार प्रदर्शन के लिए 30% अंकभार दिया जाता है, शेष 70% अंकभार NET मे प्राप्त अंकों के आधार पर निर्धारित किया जाना)। 
  • स्टेप - 7 : विश्विद्यालय द्वारा NET परीक्षा के (70% अंकभार) और साक्षात्कार (30% अंकभार) के आधार पर मेरिट जारी किया जाना। मेरिट में सफल विद्यार्थियों को कॉल किया जाना। 
  • स्टेप - 8 : मेरिट में सफल घोषित छात्रों द्वारा कोर्स वर्क के लिए फीस जमा कराना। 
  • स्टेप - 9 : विश्वविद्यालय द्वारा कोर्स वर्क करा परीक्षा ले परिणाम घोषित किया जाना। 
  • स्टेप - 10 : छात्र द्वारा या विभाग (आवंटित) द्वारा मार्गदर्शक (Guide) का चयन ।
  • स्टेप - 11 : : कोर्स वर्क में सफल छात्रों द्वारा पीएचडी कार्य की रूपरेखा (Synopsis) जमा कराना। 
  • स्टेप - 12 :  विश्विद्यालय की विभागीय कमेटी द्वारा रूपरेखा को स्वीकृति।
  • स्टेप - 13 : विभागीय कमेटी द्वारा स्वीकृत रूप रेखा को रिसर्च बोर्ड को भेजना। 
  • स्टेप - 14 :  रिसर्च बोर्ड द्वारा रूपरेखा को स्वीकृति देना। 
  • स्टेप - 15 :  छात्र द्वारा पंजीयन फॉर्म के साथ फीस जमा कराना। 

अस्वीकरण - उपर्युक्त सभी कदम आदर्श कदम है। सभी विश्वविद्यालय की अपनी प्रक्रिया हो सकती है, ऐसे में आप अपने विश्वविद्यालय से एक बार कन्फर्म जरूर कर ले। 

अगर कोई छात्र ने स्कानोत्तर या पूर्व डिग्री किसी अन्य विश्वविद्यालय से की है तो प्रव्रजन प्रमाणपत्र अवश्य जमा कराए। पीएचडी में प्रवेश के बाद वार्षिक फीस समय से जमा कराए विश्वविद्यालय और अपने मार्गदर्शक गुरु के आदेश का पालन करे। पीएचडी मार्गदर्शक और छात्र के बीच चलने वाला शोध कार्य है ऐसे में मार्गदर्शक से मिलते रहे और उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का अंशरत: पालन करें। 

विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रवेश प्रक्रिया बंद किए जाने के कारण - 


वर्तमान में सभी विश्वविद्यालय राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा से प्रमाणपत्र प्राप्त छात्रों को ही प्रवेश देंगे। पहले किसी भी छात्र को प्रवेश दिया जा सकता था, जिसने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया हो लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जाने प्रवेश परीक्षा को बंद किए जाने के निम्नलिखित कारण है - 

  • समान परीक्षा का ना होना - अब तक सभी विश्वविद्यालय अपने स्तर पर पीएचडी में प्रवेश देने के लिए परीक्षा का आयोजन करवाते आ रहे थे। सभी विश्वविद्यालय की परीक्षा अपने स्तर पर थी। राज्य या केंद्र स्तर पर कोई समान परीक्षा का आयोजन नहीं होता था, ऐसे में पीएचडी में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को नुकसान होता था क्योंकि प्रत्येक विश्वविद्यालय की परीक्षा का अपना स्तर और नियम थे। अब राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा को ही पीएचडी प्रवेश के लिए वैध परीक्षा मान लिया गया है, ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर पीएचडी प्रवेश के लिए एक समान परीक्षा के आयोजन की शुरुआत हो गई है। 
  • विश्वविद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके अपनाना - अब तक जितने विश्वविद्यालय उतने नियम वाली कहावत चरितार्थ होती रही है, विश्वविद्यालयों द्वारा अपनायी जाने वाली प्रवेश प्रक्रिया को लेकर। लेकिन अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा को ही प्रवेश के लिए वैध परीक्षा माने जाने के पश्चात्‌ विश्वविद्यालयों की मनमानी समाप्त होने की कगार पर है। अब विभिन्न विश्वविद्यालय पीएचडी प्रवेश के लिए मनमानी नहीं कर पाएंगे क्योंकि अब एक ही परीक्षा होगी, उसी के अंकों के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। पहले विश्वविद्यालय NET, SET और स्वयँ की परीक्षा के अंकों (कौन परीक्षा देगा कौन नहीं) आदि नियमो में छात्रों को उलझा कई बार NET पास को परीक्षा ना दिला अपने स्तर पर कराई परीक्षा और NET के अंकों को समान भार दे NET उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रवेश की मेरिट में पीछे कर देता था, अब नए नियमो में ऐसा संभव नहीं होगा एक ही परीक्षा के चलते और ना ही छात्रों में किसी प्रकार के भ्रम की उत्पत्ति होगी। 
  • पारदर्शिता का अभाव - जब विश्विद्यालय अपने स्तर पर परीक्षा का आयोजन करा पीएचडी में प्रवेश देता था तब वो अपने मनमाने नियम लगा देता था। मनमाने नियमो के चलते प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव हो जाता था। कई बार विश्वविद्यालय अपने स्तर पर आयोजित की गई परीक्षा और प्राप्त अंकों में ही हेराफेरी कर देता था, अब नए नियमो में विश्वविद्यालय द्वारा ऐसा नहीं किया जा सकेगा, जिससे पारदर्शिता पहले के मुकाबले में बढ़ेगी। हालांकि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया जाने वाला साक्षात्कार अब भी पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न कर सकता है किन्तु उसका अंकभार कम होने से पुर्णतः हेर-फेर संभव नहीं है, जो पहले संभव थी। 
  • अलग-अलग विश्वविद्यालय के अलग-अलग नियम -  पहले विश्वविद्यालय मनमाने तरीके से नियम बना लेते, जिससे कई बार ऐसे छात्रों को नुकसान हो जाता जो वाकई पीएचडी में प्रवेश के लिए योग्य होते थे। उदाहरणार्थ स्वयं के विश्वविद्यालय से मास्टर्स डिग्री उत्तीर्ण को अतिरिक्त अंक दे देना। कई विश्वविद्यालयों से उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को परीक्षा के उत्तीर्ण कर देने के बाद यह कहकर बाहर कर देना की फलाँ विश्वविद्यालय से मास्टर्स करने वाले छात्र हमारे विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश के लिए योग्य नहीं हैं। 
  • विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों का अन्तर - विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा कराई जाने वाली मास्टर्स डिग्री के पाठ्यक्रमों में अन्तर पाया जाता है, इस अन्तर के कारण कई विद्यार्थी विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाली परीक्षा में समान रूप से प्रदर्शन नहीं कर पाते थे। कई बार विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के लिए सही पाठ्यक्रम का उपयोग तक नहीं किया जाता। ऐसे में इस अन्तर को कम करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा का महत्व ही समाप्त कर दिया गया। 

विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रक्रिया को बंद कर राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश दिए जाने से पारदर्शिता को बढावा मिलने के साथ आने वाले समय में विश्वविद्यालयों में योग्य छात्रों के प्रवेश को बढावा मिलेगा। योग्य छात्रों के प्रवेश को बढावा मिलने से विश्वविख्यात अनुसंधान को बढावा मिलेगा। 

उम्मीद है कि आने वाले समय में पीएचडी में योग्य छात्रों के प्रवेश के साथ ही विश्वविद्यालयों की छवी पर सकारात्मक प्रभाव होगा। विश्वविद्यालय छात्रों और शोधार्थियों द्वारा किया जाने वाला शोध सही दिशा में जाएगा। पीएचडी में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को पारदर्शिता के कारण उत्सुकता रहेगी और प्रतिस्पर्धी वातावरण में एक बेहतर अनुसंधानात्मक शोध को अंजाम देंगे। 

अन्य प्रश्न -

प्रश्न - पीएचडी को हिन्दी में क्या कहते हैं?

उत्तर - पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलाॅसफी) को हिन्दी में विद्या वाचस्पति की उपाधि कहा जाता है।

प्रश्न - पीएचडी करने के लिए मास्टर डिग्री में न्यूनतम कितने प्रतिशत अंक होने आवश्यक है?

उत्तर - पीएचडी में प्रवेश के लिए न्यूनतम 55% अंक मास्टर डिग्री में होने आवश्यक है।

प्रश्न - नए नियमों के अन्तर्गत पीएचडी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के अंकों का कितना अंकभार लिया जाता है?

उत्तर - नए नियमों के अंतर्गत पीएचडी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा में प्राप्त अंकों का 70% अंकभार लिया जाता है शेष 30% अंकभार छात्र के साक्षात्कार के आधार पर लिया जाता है।

प्रश्न - क्या पीएचडी करने के लिए NET परीक्षा देना आवश्यक है?

उत्तर - पीएचडी करने के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के प्रमाणपत्र का होना आवश्यक हैं।

प्रश्न - क्या पीएचडी के लिए विश्वविद्यालय द्वारा कोई परीक्षा का आयोजन किया जाता है?

उत्तर - अब भारत के सभी विश्वविद्यालयों द्वारा राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) में प्राप्त अंकों के 70% अंकभार और साक्षात्कार के 30% अंकभार के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा अब किसी भी प्रकार की परीक्षा का आयोजन नहीं कराया जाता है। 

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