स्वामीनाथन आयोग कि रिपोर्ट: सिफारिश और क्रियान्वयन

मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन आनुवांशिकी (कृषि वैज्ञानिक) वैज्ञानिक थे। इन्हें भारत में हरित क्रांति का अगुआ माना जाता है। इनका जन्म 7 अगस्त, 1925 को कुम्भकोणम, तमिलनाडु में हुआ। इन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान पारिषद (Indian Council Agricultural Research - ICAR) के महानिदेशक रह चुके हैं। गेंहू कि विशेष किस्म की पहचान कर उसे विकसित कर उपज को बढ़ाने में इनका विशेष योगदान रहा है। 

स्वामीनाथन आयोग कि रिपोर्ट: सिफारिश और क्रियान्वयन


इन्हें भारत में आधुनिक कृषि सुधारक, हरित क्रांति के जनक (भारत में), कृषि आयोग के अध्यक्ष के रुप में जाना जाता है। इनकी पहचान स्वामीनाथन आयोग के अध्यक्ष के रूप में है। स्वामीनाथन आयोग भारत का प्रथम किसान आयोग के अध्यक्ष थे, जिसका गठन 18 नवंबर, 2004 में हुई थी। 

राष्ट्रीय किसान आयोग (NFC) 


भारत में किसान आयोग कि गठन 10 फरवरी, 2004 मे हुआ। प्रथम किसान आयोग कि विधिवत स्थापना 18 नवंबर, 2004 को हुई। एम एस स्वामीनाथन इस आयोग के अध्यक्ष बने। इस आयोग ने दिसंबर 2004 से अक्टूबर 2006 तक पांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। के मध्य आयोग ने किसानो कि आय को बढावा देने न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price - MSP) लागू किए जाने के सम्बंध में महत्त्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत की। 

इस आयोग ने प्रथम चार रिपोर्ट क्रमशः दिसंबर 2004, अगस्त 2005,दिसम्बर 2005, अप्रैल 2006 को प्रस्तुत की। अंतिम रिपोर्ट अक्तूबर 2006 में पेश की। इस रिपोर्ट में कुल 201 सिफारिश की गई। अंतिम रिपोर्ट किसानो के संकट, कारण और आत्महत्या पर केंद्रित थी। इन्हें कम करने के लिए फार्मिंग उत्पादन स्थिरता पर जोर दिया। उत्पादन कि गुणवत्ता में सुधार के लिए इस रिपोर्ट में कुपोषण घटाने के लिए खाद्य और पोषण समिति बनाने कि भी सिफारिश हुई, किन्तु बात हमेशा एमएसपी कि ही होती है इसलिए इनके द्वारा दिए गए एमएसपी के फॉर्मूला को समझना जरूरी है। 

न्यूनतम समर्थन मूल्य का फॉर्मूला - MSP formula - 


स्वामीनाथन के अध्यक्षता वाले प्रथम किसान आयोग ने न्युनतम समर्थन मूल्य का C2+50% का फॉर्मूला दिया। 

क्या है C2+50% फॉर्मूला? 


इस फॉर्मूले में फसल कि लागत को गणना करने के लिए इसे तीन हिस्सों में बांटा हुआ है A2, A2+FL और C2 आदि। हालांकि खेती का तरीका कोई भी हो स्वयं कि भूमि या किराये की भूमि, स्वयं के उपकरण अथवा किराये के उपकरण आदि। पर किसी भी प्रकार कि खेती करने वाले किसानों को एमएसपी केवल C2 लागत के आधार पर ही मिलनी चाहिए। ईन सभी को बेहतर तरीके से समझने के लिए आप नीचे कि टेबल को देखे। 

यहां - 

 A2 = नकदी खर्च (खाद, बीज, बिजली, पानी और मजदूरी), 
A2+FL = नकदी खर्च के साथ किसान परिवार कि अनुमानित मेहनत लागत, 
C2 = नकदी और गैर नकदी के साथ जमीन का लीज रेट। 

स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की थी कि किसानो को C2 का 50% जोड़कर यानी उसकी लागत का 150% न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाना चाहिए। 

लागत निकालने का सूत्र  मानदंड 
A1 विधि  सभी नकद भुगतान - खाद  बीज, पानी बिजली, मजदूरी और कृषि यंत्रों का किराया 
A2 विधि  A1+भूमि का किराया 
B1 विधि A1+कृषि के किराये पर ली गई संपत्तियों का किराया 
B2 विधि  B1+खुद कि भूमि का किराया अथवा
दूसरे व्यक्ति से किराये पर ली गई भूमि का किराया 
C1 विधि  B1+खुद के परिवार के सदस्यों कि अनुमानित मजदूरी 
C2 विधि  B2+खुद के परिवार के सदस्यों कि अनुमानित मजदूरी 

कृषि संकट और अहम सिफारिशें - 


स्वामीनाथन आयोग ने कृषि संकट के कारण गिनाये। इनमे भूमि सुधार की कमी, पानी कि निम्न मात्रा और गुणवत्ता, तकनीकों का अभाव, निवेश एंव संस्थागत ऋण का अभाव, विपणन संबंधी समस्या और प्रतिकूल मौसम। इन्होंने रिपोर्ट में यह भी कहा कि 10% किसानो के पास 54% जमीन है। 

इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए स्वामीनाथन आयोग ने सुझाव भी दिये थे। रिपोर्ट में कहा गया कि बंजर भूमि को किसानो में बांटा जाना चाहिए। गैर-कृषि भूमि को वन विभाग और उद्योग जगत को नहीं बांटा जाना चाहिए। प्रतिकूल मौसम में आदिवासियों पहुंच जंगल तक बना दी जावे और पशु चराई निर्बाध की जावे। कृषि भूमि के विनिमयन को मजबूत करने के लिए तंत्र की स्थापना। राष्ट्रीय स्तर पर भूमि उपयोग सलाहकार समिति कि स्थापना कर भूमि उपयोग और फसल चयन में सलाह के साथ विपणन को दिशा देना। 

आयोग कि सिफारिशों का क्रियान्वन - 


स्वामीनाथन आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को पूरी तरह से क्रियान्वयन करने से सरकारे हमेशा से कतराती रही। लेकिन वर्तमान सरकार नें किसान कि वास्तविक आय में बढ़ोतरी करने में रुचि दिखाई ऐसा स्वामीनाथन स्वयं का मानना था, हालांकि उन्होंने तत्कालीन सरकार के बारे में कभी कुछ नहीं कहा। लेकिन हम बात करते हैं, किसने क्या किया? इस क्रियान्वयन को हम दो हिस्सों में बांट देते हैं, यूपीए और एनडीए।

वर्ष 2006 में जब स्वामीनाथन आयोग ने सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की तब से वर्तमान समय तक रिपोर्ट मीडिया के साथ किसान संगठनों में बहुत प्रचलन में रही। सरकार ने वर्ष 2007 में रिपोर्ट में उल्लेख किए गए तथ्यों के आधार पर 201 हिन्दुओ की पहचान की। इन सभी 201 बिंदुओं को रिपोर्ट कि सिफारिश के तौर पर माना गया।  इस समय से आज तक यूपीए और एनडीए की सरकारे केंद्र में रही। किसने स्वामीनाथन आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए कितना कार्य किया यह हम आसानी से समझ तो सकते नहीं। इसे समझने के लिए सरकारों को संसद में पूछे गए प्रश्नो और सरकार कि तरफ से दिए गए उत्तर का सहारा लेना होगा ताकि हम समझ सके कि सरकारों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए क्या महत्वपूर्ण कदम उठाए? हालांकि सभी क़दमों का वर्णन करना आसान नहीं हो सकता है, इसलिए इन्हें संसद कि कार्यवाही में आए मुद्दो को संक्षिप्त तौर देखते हैं। 

यूपीए - 


प्रतिष्ठित हिन्दी भाषा के समाचार पत्र बिजनेस स्टैंडर्ड कि रिपोर्ट के मुताबिक यूपीए कि सरकार में रिपोर्ट जमा हुई तब यूपीए की सरकार थी। इसके क्रियान्वयन को लेकर जब बीजेपी सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने (16 अप्रैल, 2010) को सरकार से पूछा - 

क्या किसानो को एमएसपी दिए जाने के मसले पर सरकार स्वामीनाथन आयोग की ओर से दी गई सिफारिशों को लागू करने जा रही है? 

प्रकाश जावड़ेकर द्वारा पूछे गए सवाल का जबाब कृषि राज्य मंत्री के वी थॉमस ने दिया। उन्होंने इसे लागू करने के लिए साफ इंकार कर दिया और विस्तार से इसे लागू नहीं कर नहीं पाने के कारण बताए, कहा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव होगा। एमएसपी संबंधित सवाल का जवाब देते हुए यहां तक कह दिया कि एमएसपी और फसलों के उत्पादन लागत को जोड़कर देखना गलत है। 

एनडीए - 


जैसा कि 2010 के विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए सवाल पूछा ठीक उसी तरीके से 2018 में भी विपक्ष ने एनडीए कि सरकार से सवाल पूछा यह सवाल कांग्रेस राज्यसभा सांसद अम्बिका सोनी (14 दिसंबर, 2018)ने पूछा, जिसे आप नीचे चित्र में देख सकते हैं। 

स्वामीनाथन आयोग कि रिपोर्ट: सिफारिश और क्रियान्वयन


सरकार नें इसका जबाब देते हुए कहा कि 2007 में पहचान की गई 201 सिफारिश में से सरकार नें अब तक 192 सिफारिश को लागू किया है। 

स्वामीनाथन स्वयं मान चुके, मोदी सरकार नें सिफारिशों को माना - 


एम एस स्वामीनाथन ने 5 अक्तूबर, 2018 को भारत के प्रतिष्ठित अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में एक लेख लिखा। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2006 में रिपोर्ट जमा कराने के बाद से अब तक सिफारिशों को नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से क्रियान्वयन किया जाना शुरु किया गया। नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालने के बाद सरकार नें किसानो की आय और स्थिति को सुधारने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। 

सरकार द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करना, फसल की बुनियादी स्वास्थ्य आवश्यकता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से बढावा, राष्ट्रीय गोकुल योजना से स्वदेशी पशु नस्ल का संरक्षण, इलेक्ट्रॉनिक मंडी, संस्थागत ऋण बढ़ोतरी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग। पशुधन विपणन अधिनियम के साथ। अस्थायी रूप से लागू किए गए अनुबंध खेती अधिनियम, 2018 की भी सराहना की। इस अनुबंध खेती को सदन से पारित किये जाने के बाद किसानो के दबाब के कारण वापस लेना पड़ा था। 
नरेंद मोदी सरकार द्वारा पहले की अपेक्षा एमएसपी पर अधिक खरीद को भी उल्लेखनीय करार दिया। पीडीएस के साथ अपरान्ह भोजन में दल और बाजरा के उपयोग को सराहा। कृषि आधारित गतिविधियों के उत्थान के साथ, प्रधानमंत्री द्वारा 5 वर्ष में किसानो की आय को दुगुना करने के प्रयास और कार्यो की भी सराहना की। मजबूत विपणन के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के साथ जलीय कृषि के लिए घोषित फण्ड को श्रेष्ठ बताता। 

किसानो द्वारा ऋण माफी और एमएसपी लागू किए जाने के आन्दोलन पर कहा कि सरकार अब इन मुद्दों पर ध्यान दे रही है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वर्तमान सरकार कि योजनाओं को केंद्र और राज्य मजबूती से लागू करे तो किसानो के भविष्य को सुधारा जा सकता है। राष्ट्रीय पोषण मिशन के बजट राशि का उल्लेख कर इसे किसानो के लिए बेहतर बताया। 

इस लेख को लिखने के कुछ साल बाद 28 सितंबर, 2023 को एम एस स्वामीनाथन कि मृत्यु हो गई। मरणोपरांत भारत सरकार नें इन्हें 'भारत रत्न' देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वर्ष 2024 में नवाजा गया। 

धरातल - 


एमएसपी पर खरीद में उत्तरोत्तर प्रगति हुई है लेकिन सम्पूर्ण फसल को एमएसपी पर खरीदा आज भी नहीं जा रहा है। जिसके चलते किसान बार-बार आन्दोलन भी करते हैं। दूसरी ओर सरकार द्वारा फसलों कि गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक मात्रा में खाद और बीज को उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, अब तक इसे उपलब्ध कराने की गारंटी नहीं दी जा सकी है। हालांकि फसल उत्पादन की गुणवत्ता के मामले में किसानो की तरफ से भी सरकार नें मांग नहीं की गई। 

स्वामीनाथन आयोग द्वारा किसानो को एमएसपी दिए जाने की बात को हमेशा सदन में और सड़क पर उठाया जाता रहा है, लेकिन इनके द्वारा एमएसपी के लिए दिए गए फॉर्मूला पर कोई बात नहीं होती है और ना ही सरकारों द्वारा किसान की वास्तविक लागत को निकालने के लिए प्रयास हुए हैं। किसान संघठन भी बार-बार एमएसपी कि मांग ज़रूर करते हैं किन्तु भूमि सुधार की बात नहीं करते हैं। 

भूमि सुधार के लिए सीलिंग के प्रयास सरकार द्वारा नहीं किए गए और ना ही किसान संगठन इस कार्य के लिए सामने आए। दूसरी तरफ बंजर भूमि को किसानो में आवंटित किया जाना कोई संभव कार्य प्रतीत नहीं होता है। बंजर भूमि के आवंटन से ओरण भूमि, अरण्य पर विपरीत असर होने की संभावना अत्यधिक होने से सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक नहीं दिखी। सरकार द्वारा इस तरह के प्रयास के वन्यजीवों पर विपरीत असर की भी संभावना अधिक हो सकती है। पानी के अभाव से जुझ रही कृषि और कृषि क्षेत्रो में पानी पहुंचाने के लिए सरकार का सकारात्मक रुप अब तक सामने नहीं आया है। 

आवश्यक प्रश्न उत्तर - 

प्रश्न: एम एस स्वामीनाथन का पूरा नाम क्या है? M S Swaminathan full name in hindi 

उत्तर: प्रोफेसर मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन। 

प्रश्न: एम एस स्वामीनाथन आयोग ने कुल कितनी सिफारिश की थी? 

उत्तर: प्रोफेसर मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले आयोग द्वारा कुल 201 सिफारिश की थी। 

प्रश्न: एम एस स्वामीनाथन आयोग का एमएसपी का फॉर्मूला क्या है? 

उत्तर: प्रोफेसर मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन आयोग का एमएसपी का फॉर्मूला C2+50%  है। 

प्रश्न: एम एस स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट कब सौंपी? 

उत्तर: प्रोफेसर मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन आयोग ने कृषि संबंधी अपनी रिपोर्ट पांच हिस्सों में प्रस्तुत की, अंतिम और पांचवी रिपोर्ट अक्तूबर, 2006 में प्रस्तुत की।

प्रश्न: एम एस स्वामीनाथन आयोग का गठन कब हुआ? 

उत्तर: प्रोफेसर मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन आयोग का गठन 18 नम्बर, 2004 को हुआ। 

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1 टिप्पणियाँ

Pankaj kumar ने कहा…
सटीक लेख ।