पति पत्नी का पवित्र रिश्ता खुशहाल जीवन। Pati Patni

पति और पत्नी जीवन के सफर मे रथ के दो पहिये है। दोनों में तालमेल का होना आवश्यक है। तालमेल के अभाव में गन्तव्य तक पहुंचने में कई बाधाएं खड़ी हो जाती है। दोनों का एक धुरी से जुड़ा हुआ होना और धुरी पर मजबूत पकड़ से यात्रा आसान हो जाती है। किसी भी एक पहिये का धुरी से दूर होना या चाल चलन का तरीका बदल जाने से यात्रा दुर्गम और कष्टकारी हो जाती है।


पति और पत्नी के लिए धुरी परिवार है। परिवार ही उन्हें आकर्षित करता है और जोड़कर रखता है। परिवार के सदस्य और दोनों की घनिष्ठता उनमे तालमेल बनाकर रखते हैं, जिससे यात्रा सुगम हो। रिश्ते को बेहतर करने और सफर को उम्दा बनाने के लिए दोनों को एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए, जिससे रिश्ते स्फूर्ति से भर जाए और दिन दुगुने रात चौगुने प्रगाढ़ हो।

पति - पत्नी का रिश्ता -


पति और पत्नी का रिश्ता दुनिया के सभी रिश्तों में सबसे पवित्र और अनमोल है। यह बंधन साँस से साँस का बंधन है दो दिल एक धड़कन। पति झरना है तो पत्नी उसका पानी, पति पेड़ है तो पत्नी छांव। दोनों एक-दूसरे का अंग है, किसी एक के अभाव में दोनों का अस्तित्व व्यर्थ हो जाता है। दोनों मिलकर एक दूसरे को पूरा करते हैं जैसे बिना पानी के झरने की कल्पना संभव नहीं है। वैसे ही बिना पेड़ के छांव संभव नहीं है। दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे पर है वैसे ही पति, पत्नी से बनता है और पत्नी का अस्तित्व भी पति से होता है। यह रिश्ता इतना गहरा है, जिसकी कल्पना संभव नहीं क्योंकि एक बार हाथ थाम लिया तो साँस की डोरी ही छुड़ा सकती है, स्वयं पति पत्नी नहीं। 

पति पत्नी के रिश्ते में दोनों की एक-दूसरे की समझ और समर्पण की भावना ही इसका केंद्र है। दोनों के जीवन का सार एक-दूसरे की भावना को महत्व देना है। एक के उम्मीदों के पुल दूसरे के समर्पण से पार करने होते हैं। दोनों का महत्व बराबर होता है, दोनों के ख्वाब होते हैं। एक के ख्वाब को दूसरे के सहारे से पूरा किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार एक नर अपने आप में नारी के बिना अधूरा है क्योंकि नारी (पत्नी) उसकी अर्धांगिनी होती है, जो उसके जीवन को पूरा करती है। नारी, नर की वामिंगी है। पत्नी अपने पति का बांया अंग है, जो पति के शरीर को पूर्ण करती हैं। ऐसे में पत्नी भी पति से पूरी होती है। 

दाम्पत्य जीवन का सार दोनों की सांसो से संसार के सागर में आने वाली बाधाओं को पार करने से है। दोनों का उदेश्य संसार के भंवर में एक-दूसरे का साथ देकर मानव सभ्यता को आगे बढ़ाना है। प्रकृति के नियम से भी नर और नारी के सहयोग के बिना मानव सभ्यता और संसार को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसी के कारण दोनों का जीवन एक-दूसरे से इसलिए भी जुड़ा हुआ है, जिससे मानवता और सभ्यता कायम रहे। नई पीढ़ी का आगमन हो। 

कैसे बिगड़ता है पति-पत्नी का रिश्ता? -


दुनिया का सबसे अनमोल रिश्ता जिसे प्रकृति ने मानव सभ्यता को बढ़ाने के लिए बनाया और मनुष्य ने दाम्पत्य के लिए। आज यह रिश्ता खतरे में है। वर्तमान में, छोटे मोटे झगड़े से पति-पत्नी का रिश्ता बिगड़ने लगता है, जिसे पुनः पटरी पर लाना काफी चुनौती भरा काम बन जाता है। वास्तव में, झगड़ा रिश्ता बिगाड़ता जरूर है लेकिन कारण नहीं है। झगड़ा मनमुटाव और अन्य कई कारकों का परिणाम है और झगडे का परिणाम रिश्ते में दरार और कड़वाहट। जो कड़वाहट रिश्ते में आ रही है, वही इसे एक विकराल रूप दे रही हैं, ऐसे में बात करते हैं उन कारकों की जो पति-पत्नी के बीच दरारे ला रहे हैं। 
  1. एक दूसरे को समय नहीं देना और समझ को विकसित नहीं किया जाना। 
  2. पति-पत्नी के मध्य संवाद का अभाव, जिससे रिश्तों में प्रगाढ़ता उत्पन्न ही नहीं होती। 
  3. खाने के नुक्स निकालने की आदत, रिश्ते को ढेर कर वैमनस्य पैदा कर देती है। 
  4. अनावश्यक बातों को लेकर मनमुटाव करना, जिससे रिश्ते में दरार आती है। 
  5. पार्टनर की बजाय अन्य लोगों की बातों के विश्वास में आकर झगड़ा करना। 

पति-पत्नी के बीच का रिश्ता जितना अनमोल है उतना कोमल भी। इस पवित्र रिश्ते को अपवित्रता से भंग करने की कोशिश इसकी नींव को ढहा देती है। दोनों को एक-दूसरे को आदर-सम्मान देने के साथ ही जहां आवश्यकता हो वहाँ संवाद करते रहना चाहिए। संवाद के अभाव में भावनात्मक संबन्धों की नींव नहीं रखी जा सकती हैं और बिना नींव की दीवारों का क्या हश्र होता है? आप जानते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता दो लोगों का रिश्ता है, तीसरे पक्ष को आवश्यकता से अधिक महत्व देने से तालमेल बिगड़ जाता है और जीवन के रथ का हश्र बिगड़ सकता है। आवश्यकता है दोनों को एक-दूसरे पर विश्वास करने की ना की दूसरों की बातों में आने की। 

क्यूं बिखर रहे हैं परिवार?


जब पति-पत्नी के मध्य बिना बात के झगड़े होने लगते हैं और एक-दूसरे की शिकायत का अवसर तलाशने की आदत की उत्पत्ति होने लगती है तो रिश्ते की नाजुक डोर टूटने लगती हैं। संवाद की जगह झगडे ले लेते हैं, तब रिश्ता बोझ बन जाता है। बोझ में दबा पक्ष निकलने के तरीके ढूँढने लगता है जिनका अंत होता है रिश्ते का अंत। पति-पत्नी का रिश्ता टूटने का अर्थ दो लोगों के बंधन से मुक्त होने तक सीमित नहीं है। इस रिश्ते के अंत का अर्थ परिवार के बिखरने से है। बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने से है। घर के बुजुर्गों को अपने कर्मों को कोसने को मजबूर करने से और स्वयं को तनाव की जद में कैद कराने से। परिवार व्यक्ति की मजबूती होती है, उसके बिखरने का मतलब खुद को तोड़ देने से है। ऐसे में परिवार के टूटने के कुछ कारणों पर प्रकाश डालना आवश्यक हो जाता है, आइए जानते हैं, इसके कारणों को। 
  • प्रतिबद्धता का अभाव - पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक, व्यवहारिक और क्रियात्मक तरीके से प्रतिबद्ध होना चाहिए। इसके अभाव में राह अलग होने की नौबत आ सकती है। 
  • बेवफाई - शादी के बंधन में बंधी दंपत्ति अगर बेवफाई कर दे। दोनों में से किसी का भी विवाहेत्तर संबन्ध उजागर हो जाए तो इससे दूसरा इतना आवेश में आ जाता है कि विवाह के बंधन से खुद को मुक्त करके ही मानता है। 
  • दुर्व्यवहार - पति-पत्नी रथ के पहियों के भांति है जो एक ही धुरी या उदेश्य से जुड़कर अग्नि को साक्षी मानते हुए साथ जीने की शपथ लेते हैं। एक - दूसरे को सम्मान देने की शपथ लेते हैं, किन्तु कोई एक दुर्व्यवहार की शुरुआत कर दे तो बंधन की डोर टूट जाती है। 
  • परिवार का प्रेशर - कई बार परिवार के सदस्य दंपति को मजबूर कर देते हैं। हर छोटी सी बात में दंपति के परिजन दखल दे और उन्हें आपसी संवाद से रोकने लगे तो रिश्ते की डोर टूट ही जाती हैं। 
  • उम्मीद का पूरा ना होना - खासतौर से दुल्हन को दूल्हे से कई आर्थिक और सामाजिक उम्मीदे होती है। ये उम्मीदें पूरी नहीं होती है तो परिवार पर भारी पड़ जाती है। 
  • अहम का भाव - छोटी से बात पर झगड़ा हो जाए तो किसी एक को अपनी गलती मान झगडे को समाप्त कर देना चाहिए। दोनों ही पक्ष अपनी अहम मे फंस जाए तो यह घमंड का जाल रिश्ते के बंधन को जकड़ लेता है और जीवन के सफर के राहगीरों को मुक्त कर देता है। 
  • जिम्मेदारी से मुँह मोड़ना - किसी एक पक्ष द्वारा अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभाने से रिश्ता संकट में आ जाता है। 

परिवार ही वह धुरी है जो दोनों को जोड़ कर रखती है। अगर दोनों धुरी से ही अलग होने लगे तो रथ का धराशायी होना ही है। ऐसे में आवश्यक है दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए मजबूती से धुरी के केंद्र पर ध्यान केंद्रित करे तो परिवार टूटने से बचाया जा सकता है। 
 

पति अगर पत्नी से मारपीट करता हो तो क्या करें? - 


पति-पत्नी में झगड़ा आम है, तब तक जब तक एक-दूसरे की जान पर ना आ जाए। थोड़ा विवाद चलता है। लेकिन विवाद ऐसा नहीं हो जाना चाहिए कि पत्नी का जीवन ही संकट में आ जाए। थोड़ा सा विवाद पति-पत्नी स्वयं या परिवार के सदस्यों के सहयोग से सुलझाया जा सकता है। विवाद बढ़ते हुए पत्नी को शारीरिक रूप से प्रताड़ित इस हद तक किया जाए की उसके प्राण ही ले लिए जाए तब वो निम्न कार्य कर सकती है - 
  • परिवार और पड़ौस की महिलाओं का सहयोग - पति से झगड़ा इस कदर बढ़ जाए कि जान लेने को उतारु हो जाए तो उसका गुस्सा शांत होने तक परिवार और पड़ौस की महिलाओ का सहयोग ले। गलती से किसी पुरुष के पास नहीं जाना चाहिए। किसी पुरुष का सहयोग बात बिगाड़ देता है। 
  • पीहर चली जाए - कुछ समय के लिए पीहर चले जाना चाहिए, गुस्सा शांत होने के बाद वापस आ सकती है। 
  • काउंसलिंग - किसी संगठन की मदद से पति की काउंसलिंग करा मामले को शांत करने का प्रयास किया जा सकता है। 
  • पुलिस की मदद ले - आवश्यकता होने पर पुलिस का भी सहयोग लिया जा सकता है, इसके लिए निःशुल्क हेल्पलाइन पर कॉल करे। 

खुद को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए बात को सम्भालने और परिवार को फिर से बसाने की पूरी कोशिश की जानी चाहिए। लेकिन जब बात बन ही नहीं रही है, लाख कोशिश के बावजूद भी तब तलाक भी ले सकती है। यहाँ ध्यान दीजिये तलाक एक विकल्प है परिणाम नहीं। तलाक सबसे अंत में लिया जाने वाला फैसला है ना की थोड़ा मनमुटाव हुआ और ले लिया तलाक। 

कैसे बिगड़ी बात स्वयं संवारे -


पति-पत्नी का रिश्ता दिलों से जुड़ा हुआ होता है। एक-दूसरे का त्याग आसान नहीं होता है। जब दंपति के बच्चे है तो फैसला और भी कठिन होता है त्याग का। ऐसे में थोड़े मनमुटाव के बाद बिगड़ी बात को सम्भालने की कोशिश की जानी चाहिए, जिससे परिवार ना टूटे और ना ही खुद। परिवार को सम्भाल जिंदगी के सफर में आगे बढ़ना ही असली जिंदगी है। हर बार परिवार के एक सहयोगी और नेतृत्व कर्ता होने के नाते यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि सब मेरा ही कहा सुना, सब मेरी ही माने। आप अपनी बात मानने की बजाय साथी की बात मानने को तैयार रहें आपको लगे कुछ गलत है तो शांति से दोनों मिलकर निर्णय ले। जब तक किसी तीसरे पक्ष को बीच में ना आने से तब तक आप हरसंभव कोशिश के बावजूद भी किसी निर्णय पर पहुंचने में कामयाब ना हो। 

पति-पत्नी में थोड़ी खटपट समान्य है। उसे थोड़ा ही रखे, इतना ना बढ़ने दे जिससे शारीरिक और मानसिक क्षति हो। स्वयं के गुस्से को नियंत्रित रखे, तिल का ताड़ ना बनाये तो परिवार संवर सकता है। छोटी-मोटी गलती को नज़रंदाज कर मन में कोई भ्रम ना पाले। मन में पाले भ्रम जिंदगी को ही भ्रमित कर देते हैं। भ्रम के भँवर में फंसे हुए लोग कभी निकल ही नहीं सकते है, इस जाल से। 

पति पत्नी मिलकर बसाये खूबसूरत दुनियाँ -


यूँ ही नहीं कहा जाता है, तुम ही मेरी दुनियाँ हो। इसमें गहरा राज छुपा हुआ होता है। दंपती एक ही धुरी पर घूमती है और दोनों का गुरुत्वाकर्षण एक दूसरे में होता है, और इसे अटूट स्वरुप दिए बिना खुशहाल दुनियाँ संभव नहीं है। खुशहाल दुनियाँ बनाने के लिए दंपति को सबसे पहले अपने घर का माहौल खुशनुमा करना होता है। इसकी शुरुआत उन्हें स्वयं ही करनी होती है। जितना घर का माहौल खुशनुमा होगा, उतनी ही दुनियाँ खूबसूरत होगी पति-पत्नी के लिए। दुनिया भर के सुख एक तरफ घर की शांति एक तरफ। घर की एक छोटी सी उलझन दुनियाँ के सभी सुख पर भारी हैं। दोनों के आपसी रिश्ते में किसी भी प्रकार के तनाव को ना कहे। एक दूसरे का सम्मान और भावना का कदर करे। 

अपनी दुनियाँ को खूबसूरत बनाने के लिए किसी प्रकार की उलझन को जगह ही ना दे। अगर कोई उलझन रिश्ते में खटास डाल रही है तो उसे त्वरित दूर करने के लिए संवाद करे और उपयुक्त निर्णय ले। परिवारिक और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय आपसी मेलजोल और संवाद से लिए जाएं तो दुनिया खूबसूरत हो जाती है और एक-दूसरे के प्रति आदर भाव का विस्तार होता है। दाम्पत्य जीवन का आधार भावना होती है, जिसे समझना जरूरी होता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ समय निकाल कर साथ व्यतित करना जरूरी है जो तनाव को दूर कर रिश्ते में मिठास घोलता है। 

जीवन को सुखमय बनाने के लिए एक-दूसरे की जहां आवश्यकता हो वहाँ सराहना भी करते रहना चाहिए। पति-पत्नी का रिश्ता स्थायी होता है ऐसे में आप यह उम्मीद ना करे कि दूसरा आपके लिए अपनी आदत में बदलाव करेगा ऐसे में उपयुक्त यही है की आप स्वयं अपने में बदलाव लाएं। रिश्ते में विश्वास को बनाये रखने के लिए हमेशा सच्चाई से पेश आए। जो बाते छुपाने योग्य है उनको त्याग करे। झूठ बोलने और सच्चाई को छिपाने से बात बिगड़ सकती है, इसलिए ऐसा ना करे। अपने मन की बाते शेयर करते रहे और साथी की मन की बात का भी ख्याल रखे। 

अन्य प्रश्न -


प्रश्न - पति और पत्नी के बीच रिश्ता कैसा होता है?

उत्तर - एक आदर्श पति पत्नी के मध्य मधुर रिश्ता होता है, जिसमें थोड़ी खटपट हो सकती है किन्तु एक-दूसरे के प्रति पूरा समर्पण होता है।

प्रश्न - पति पत्नी के मध्य रिश्ता मजबूत कैसे होता है?

उत्तर - पति पत्नी के मध्य रिश्ता मजबूत त्याग, समर्पण और भावना से होता है।

प्रश्न - पति पत्नी घरेलू झगड़े को कैसे समाप्त कर सकते हैं?

उत्तर - दोनों मिलकर शांति से बातचीत कर आपसी विवाद को समाप्त कर सकते हैं?

प्रश्न - पति पत्नी मे झगड़ा होने पर पहले 'सॉरी' किसे बोलना चाहिए?

उत्तर - दोनों में से कोई भी सॉरी बोल सकता है, हो सकते तो जितना जल्दी हो उतना जल्दी बोले ताकि विवाद अधिक ना बढ़े।

प्रश्न - पति पत्नी में झगड़ा होने पर क्या पुलिस को कॉल करना चाहिए?

उत्तर - अगर दोनों में झगड़ा इतना बढ़ जाए, जिससे किसी को शारीरिक क्षति पहुंच सकती है तो पुलिस को कॉल करना चाहिए। 

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