दिल्ली की सड़कें दुल्हन की तरह सजी-धजी प्रतीत हो रही थीं। देशी और विदेशी मेहमानों के साथ लगभग आधे सैंकड़ों देशों के मंत्री एयरपोर्ट से भारत मंडपम तक कारों में तेजी से पहुँच रहे थे, ताकि India AI Summit 2026 में भाग ले सकें। यह भव्य आयोजन प्रतीत हो रहा था, लेकिन कार्यक्रम मीडिया और करोड़ों भारतीय जनता की नजरों से दूर, केवल पेशेवर और तकनीकी समुदाय तक ही सीमित रहा। आम लोगों के बीच इस आयोजन को लेकर कोई चर्चा देखने को नहीं मिल रही थी।
आयोजन की शुरुआत में गलगोटिया विश्वविद्यालय ने एक रोबोटिक क्वाड्रुपेड प्लेटफ़ॉर्म को स्वदेशी विकसित समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। बाद में स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शित RoboDog वास्तव में Unitree Robotics का व्यावसायिक उत्पाद है, जैसे Unitree Go2, जो वैश्विक बाजार में उपलब्ध है। यह उन्नत एक्ट्यूएटर, LIDAR आधारित नेविगेशन और एआई गेट कंट्रोल सिस्टम से लैस रेडीमेड प्लेटफ़ॉर्म है। इसे स्व-विकसित बताने के प्रयास ने तकनीकी स्वामित्व, ब्रांड पारदर्शिता और बौद्धिक संपदा दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।गलगोटिया विश्वविद्यालय की यह चूक आयोजन पर भारी पड़ती दिखाई दी। एक ओर संभावित कॉपीराइट उल्लंघन और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर प्रश्न उठे, तो दूसरी ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रदर्शनों की विश्वसनीयता भी संदेह के घेरे में आ गई। इस प्रकरण ने न केवल भारतीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र बल्कि वैश्विक एआई पारदर्शिता मानकों पर भी बहस को जन्म दिया। विश्वविद्यालय के दावे और वास्तविक उत्पाद स्रोत के बीच अंतर ने Summit की प्रामाणिकता, तकनीकी सत्यापन प्रक्रिया तथा प्रदर्शनी अनुमोदन तंत्र की कमियों को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया।
इस समिट के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं को आयोजन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे कुछ सवाल का जबाव देना ही होगा।
AI समिट और उत्पाद का प्रदर्शन -
India AI Summit जैसे आयोजनों का मूल उद्देश्य AI सेवाओं, शोध, नवाचार और नीतिगत दिशा पर विमर्श करना होता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वयं में कोई भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि डेटा, एल्गोरिद्म और कंप्यूटिंग शक्ति पर आधारित एक सेवा-आधारित प्रणाली है। ऐसे में यदि मंच पर केवल हार्डवेयर उत्पादों का प्रदर्शन प्रमुखता से किया जाए, तो यह मूल भावना से कुछ हद तक विचलन माना जा सकता है। सम्मेलन का केंद्र बिंदु तकनीकी क्षमता, स्वदेशी विकास, और वास्तविक उपयोग-परिदृश्यों का पारदर्शी प्रदर्शन होना चाहिए।
यदि Galgotias University या Wipro जैसे संस्थान किसी विदेशी उत्पाद को प्रस्तुत करते हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनका योगदान क्या है—क्या उन्होंने उस पर स्वदेशी AI मॉडल, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन, डेटा प्रशिक्षण या कोई विशिष्ट समाधान विकसित किया है। केवल आयातित उत्पाद को अपना बताकर प्रदर्शित करना पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्न खड़े करता है। AI सेवा का अर्थ है समस्या-समाधान क्षमता, न कि केवल उपकरण का प्रदर्शन।
वाणिज्यिक उत्पादों का प्रदर्शन पूर्णतः अनुचित नहीं है, बशर्ते वह AI सेवा के वास्तविक अनुप्रयोग को स्पष्ट करे। यदि किसी रोबोट, डिवाइस या प्लेटफॉर्म पर संस्थान द्वारा विकसित AI समाधान का विस्तार दिखाया जाए—जैसे निर्णय क्षमता, भाषा प्रसंस्करण या डेटा विश्लेषण—तो वह प्रासंगिक है। परंतु केवल उत्पाद-केंद्रित प्रस्तुति, बिना स्पष्ट तकनीकी योगदान के, AI समिट की बौद्धिक गंभीरता को कमजोर कर सकती है।
डेमो के लिए उत्पाद को किसकी अनुमति से उतारा गया -
किसी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में उत्पाद का डेमो प्रस्तुत करने से पहले सामान्यतः आयोजक समिति, तकनीकी मूल्यांकन पैनल और कानूनी टीम की स्वीकृति आवश्यक होती है। विशेषकर जब लगभग 100 देशों के प्रतिनिधि और अनेक मंत्री उपस्थित हों, तब कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा और मूल उत्पादक की अनुमति की जांच अनिवार्य मानी जाती है। यदि किसी विदेशी उत्पाद को बिना स्पष्ट स्रोत और अधिकार प्रमाण के प्रदर्शित किया गया, तो यह प्रक्रिया संबंधी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
आयोजक समिति की जिम्मेदारी होती है कि वह प्रत्येक प्रतिभागी संस्था से उत्पाद की उत्पत्ति, लाइसेंस, और तकनीकी स्वामित्व का लिखित विवरण ले। बड़े सम्मेलनों में आमतौर पर डेमो से पहले दस्तावेज़ सत्यापन, ब्रांड दावे की पुष्टि और साझेदारी समझौते की जांच की जाती है। यदि यह प्रक्रिया शिथिल रही, तो या तो प्रशासनिक चूक हुई या प्रस्तुतकर्ता संस्था ने तथ्यों को पर्याप्त स्पष्ट नहीं किया।
जैसे किसी प्रतिष्ठित जर्नल में शोध-पत्र कठोर समीक्षा के बाद ही प्रकाशित होता है, वैसे ही वैश्विक तकनीकी मंच पर भी पारदर्शिता सर्वोच्च मानक होना चाहिए। यदि किसी विश्वविद्यालय ने अति उत्साह या जानबूझकर विदेशी उत्पाद को अपना बताकर पेश किया, तो यह न केवल नैतिक प्रश्न है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय विश्वसनीयता का विषय भी बन सकता है।
क्या नजर खिंचने के लिए गलती जरूरी -
नज़र खींचने के लिए गलती ज़रूरी नहीं होती, लेकिन विवाद अक्सर ध्यान को तेज़ी से आकर्षित करता है। किसी बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में जहाँ 100 देशों के प्रतिनिधि और 50 देशों के मंत्री शामिल हों, वहाँ सामान्यतः नीतिगत घोषणाएँ, तकनीकी उपलब्धियाँ और साझेदारियाँ चर्चा का केंद्र बननी चाहिए। परंतु जब कोई विवाद या कथित चूक सामने आती है, तो मीडिया और सोशल मीडिया उसी बिंदु पर केंद्रित हो जाते हैं, जिससे मूल उद्देश्य पीछे छूट सकता है।
ध्यान और प्रसिद्धि में अंतर है। सकारात्मक उपलब्धि से मिली पहचान स्थायी और विश्वसनीय होती है, जबकि गलती या विवाद से मिली प्रसिद्धि क्षणिक और संदेहपूर्ण हो सकती है। यदि किसी विश्वविद्यालय की प्रस्तुति पर प्रश्न उठे और उसी के कारण आयोजन चर्चा में आया, तो यह बताता है कि संचार रणनीति और पारदर्शिता में कहीं कमी रह गई थी। स्वस्थ विमर्श उपलब्धियों पर आधारित होना चाहिए, न कि विवादों पर।
यदि प्रसिद्धि पाने के लिए त्रुटि ही माध्यम बन जाए, तो आयोजन की गरिमा और उद्देश्य दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसे आयोजनों की आवश्यकता इसलिए है कि वे नीति, नवाचार और सहयोग को आगे बढ़ाएँ। विवाद से मिली दृश्यता आयोजन का विकल्प नहीं हो सकती; बल्कि यह भविष्य में और अधिक सावधानी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की मांग को मजबूत करती है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए पिकनिक स्पॉट -
किसी बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की उपस्थिति अब सामान्य बात हो चुकी है, क्योंकि वे डिजिटल पहुँच और युवा दर्शकों तक संदेश पहुँचाने का माध्यम बनते हैं। परंतु यदि वे मंच की गंभीरता को समझे बिना उत्पादों के साथ हल्के अंदाज़ में व्यवहार करें या उपहास का वातावरण बना दें, तो इसकी जिम्मेदारी केवल उन व्यक्तियों की नहीं बल्कि चयन और आमंत्रण प्रक्रिया की भी बनती है। आयोजकों को स्पष्ट मानदंड तय करने चाहिए कि किसे, किस उद्देश्य से और किस आचार-संहिता के तहत प्रवेश दिया जा रहा है।
एंट्री सामान्यतः मीडिया पास, डिजिटल क्रिएटर रजिस्ट्रेशन या आमंत्रण के आधार पर दी जाती है। यदि सत्यापन, पृष्ठभूमि जांच और कंटेंट-उद्देश्य की स्पष्टता न हो, तो आयोजन का संदेश भटक सकता है। पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन अलग विधाएँ हैं; दोनों की अपनी भूमिका है, लेकिन पेशेवर जिम्मेदारी और मर्यादा अनिवार्य है। बिना स्पष्ट दिशानिर्देश के प्रवेश देना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देना होता है, न कि नकारात्मकता को। यदि कुछ प्रतिभागियों ने इसे “पिकनिक स्पॉट” की तरह लिया, तो भविष्य में कड़े प्रोटोकॉल, आचार-संहिता और कंटेंट मॉडरेशन की आवश्यकता और स्पष्ट हो जाती है। संतुलित भागीदारी ही आयोजन की विश्वसनीयता और गरिमा बनाए रख सकती है।
बिना अनुमति कॉलेज से उत्पाद तक सिर्फ भारत में -
इंडिया ए आई समिट में को कमियां देखने को मिली उसने किसी दौर के Arindam Chaudhuri और उनके संस्थान Indian Institute of Planning and Management से जुड़े विवादों की याद दिला दी है। कैमरों और विज्ञापनों की चकाचौंध में बिना पर्याप्त नियामकीय स्वीकृति के संस्थान खोले जाने के आरोप लगे। विदेशी विश्वविद्यालयों से “affiliated” होने के दावे किए गए, आकर्षक करियर और अंतर्राष्ट्रीय डिग्री के वादे किए गए, लेकिन बाद में मान्यता, पंजीकरण और वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठे। जिस विदेशी विश्वविद्यालय का नाम लिया जाता था, उसकी कानूनी स्थिति स्वयं स्पष्ट नहीं थी—यहीं से विश्वास का संकट पैदा हुआ।
AI समिट में भी पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं, तो ऐसे में उस दौर की ऐतिहासिक स्मृतियाँ ताज़ा हो गई हैं। समिट मे एक निजी विश्विद्यालय के साथ ही एक प्रमुख आईटी कंपनी द्वारा विदेशी उत्पाद को बिना स्पष्ट अनुमति, लाइसेंस या मूल निर्माता की जानकारी के बिना अपना उत्पाद बता प्रस्तुत कर दिया गया, तो यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि नैतिक प्रश्न भी है। बुद्धिमत्ता और शोध पर केंद्रित मंच यदि उत्पादों की सजावट तक सीमित दिखे, तो यह उद्देश्य से विचलन माना जा सकता है।
ऐसे घालमेल से सबसे बड़ा नुकसान विश्वसनीयता को होता है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत हर दावा दस्तावेज़ी प्रमाण और नियामकीय अनुपालन पर आधारित होना चाहिए। अन्यथा, आयोजन की गंभीरता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न -
प्रश्न - गलगोटिया विश्वविद्यालय द्वारा AI summit में क्या गलती की गई?
उत्तर - Galgotias University पर आरोप लगा कि उसने AI समिट में प्रदर्शित विदेशी उत्पाद को पर्याप्त स्पष्टता के बिना अपना नवाचार बताकर पेश किया। स्वामित्व, तकनीकी योगदान और लाइसेंस संबंधी पारदर्शिता स्पष्ट न होने से विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे और आयोजन अनावश्यक विवादों में घिर गया।
प्रश्न - AI समिट की विशेष उपलब्धि क्या रही?
उत्तर - India AI Summit 2026 की प्रमुख उपलब्धि विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और तकनीकी कंपनियों को एक मंच पर लाना रही। AI नीति, नवाचार, स्टार्टअप सहयोग और वैश्विक साझेदारी पर चर्चा ने भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया।
प्रश्न - क्या AI समिट में उत्पाद का प्रदर्शन उचित है?
उत्तर -AI समिट में उत्पाद का प्रदर्शन उचित हो सकता है, यदि वह वास्तविक AI नवाचार, शोध या सेवा का स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करे। केवल हार्डवेयर दिखाना पर्याप्त नहीं; उसमें विकसित एल्गोरिद्म, डेटा मॉडल या समाधान की पारदर्शी जानकारी भी होनी चाहिए, तभी प्रदर्शन सार्थक और विश्वसनीय माना जाएगा।
प्रश्न - क्या AI Summit में विदेशी उत्पाद को अपना बता प्रदर्शन करना उचित है?
उत्तर - AI Summit में किसी विदेशी उत्पाद को अपना बताकर प्रस्तुत करना उचित नहीं है। यह पारदर्शिता, बौद्धिक संपदा अधिकार और नैतिक मानकों के विरुद्ध है। यदि वास्तविक योगदान सॉफ्टवेयर, मॉडल या इंटीग्रेशन में है, तो वही स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए, न कि उत्पाद के स्वामित्व का भ्रम पैदा किया जाए।
प्रश्न - India AI Summit 2026 विवादों में क्यों आ गया?
उत्तर - India AI Summit 2026 विदेशी उत्पादों को स्वदेशी बताकर डेमो, कॉपीराइट व अनुमति पर सवाल, और सोशल मीडिया विवादों के कारण चर्चा में आया। तकनीकी योगदान की पारदर्शिता स्पष्ट न होने से आयोजन की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे और मीडिया का ध्यान नीतिगत मुद्दों से हटकर विवादों पर केंद्रित हो गया।


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