बूंद बूंद से बनता है सागर, बिन संचय नदिया के नीर सूख जाए। Bund Bund
बचपन से आप सुनते आए हैं, बूंद बूंद से बनता है सागर। बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है। हर बूंद होती है अनमोल उसे संचय करने से ही बनते हैं, तालाब ...
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Reviewed by मरुवाणी राजस्थान
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7/11/2024 08:32:00 am
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